नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की बैठकें खत्म हुए करीब दो महीने होने वाले हैं, लेकिन सत्र अब तक औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। इसके बावजूद मंगलवार तक दोनों सदनों के सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
इस तरह दोनों सदनों के एक साथ बिना सत्रावसान के रहने की यह सबसे लंबी अवधि बन गई है। इससे पहले 1989 में लोकसभा और राज्यसभा 53 दिन तक ऐसी स्थिति में रहे थे।
दोनों सदनों को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। इस बार 54 दिन बीतने के बावजूद न तो संसद की दोबारा बैठक बुलाई गई है और न ही मानसून सत्र का सत्रावसान किया गया है।
सत्रावसान नहीं होने के कारण सरकार के पास जरूरत पड़ने पर इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प मौजूद है। सत्तारूढ़ खेमे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में संसद की बैठक बुलाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही है।
हालांकि, सरकार की ओर से संसद की बैठक बुलाने या उसके संभावित एजेंडे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक हलकों में संसद की संभावित बैठक को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इनमें परिसीमन, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े अगले कदम भी शामिल हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार के मुताबिक, सत्रावसान नहीं होने के कारण सरकार इसी सत्र की बैठक दोबारा बुला सकती है। मौजूदा स्थिति का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक असर अध्यादेश को लेकर भी है।
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश तब जारी किया जा सकता है, जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। ऐसे में सत्रावसान नहीं होने की स्थिति में अध्यादेश जारी करने का रास्ता उपलब्ध नहीं रहता।
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। सदन की सामान्य कार्यवाही सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक होती है, जिसमें दोपहर 1 से 2 बजे तक भोजनावकाश रहता है। इस तरह प्रतिदिन करीब 6 घंटे कार्यवाही के लिए उपलब्ध होते हैं।
19 बैठकों के हिसाब से लोकसभा में करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन सदन की कार्यवाही लगभग 17 घंटे 30 मिनट ही चली। इस तरह करीब 96 घंटे 30 मिनट कार्यवाही नहीं हो सकी।
वहीं, 2025 का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला था। उस दौरान लोकसभा और राज्यसभा की 21-21 बैठकें हुई थीं। लोकसभा में उस सत्र के दौरान करीब 37 घंटे कार्यवाही हुई थी।