नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों की ओर से जारी विरोध प्रदर्शन के बीच इंडिया गठबंधन में आपसी मतभेद उभरने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट इस मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति से नाराज बताया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के शुक्रवार को होने वाले प्रदर्शन और राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे, संजय राउत और अरविंद सावंत समेत ठाकरे गुट के किसी भी प्रमुख नेता के आज के कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना नहीं है। बताया जा रहा है कि पार्टी का कोई सांसद भी राष्ट्रपति से मिलने जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं बनेगा। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करने और चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसी सिलसिले में इंडिया गठबंधन के सांसद राष्ट्रपति से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम से उद्धव ठाकरे गुट की संभावित दूरी ने विपक्षी एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों का दावा है कि उद्धव ठाकरे की नाराजगी की एक प्रमुख वजह कांग्रेस की कार्यशैली और विरोध प्रदर्शन में उसकी प्रमुख भूमिका है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुए पिछले कार्यक्रमों के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी प्रमुख रूप से नजर आए, जिससे ठाकरे गुट को लगा कि गठबंधन के दूसरे सहयोगियों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। इसी मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने कथित तौर पर बैठक में अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी।
इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में ठाकरे गुट को विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक कार्यक्रमों में उचित भागीदारी दी जाएगी। हालांकि, इस बातचीत के बावजूद शुक्रवार के कार्यक्रमों में ठाकरे गुट की गैरमौजूदगी की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलते हैं कि दोनों दलों के बीच मतभेद दूर करने के लिए अभी और बातचीत की जरूरत पड़ सकती है।
इंडिया गठबंधन में असंतोष की खबरें केवल शिवसेना (उद्धव गुट) तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं और सांसदों की कुछ विपक्षी बैठकों तथा कार्यक्रमों में गैरमौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई थी। विपक्षी दलों की एक लंच बैठक और रणनीतिक चर्चा में सपा के प्रमुख नेताओं के शामिल नहीं होने से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठे थे। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से यह तर्क दिया गया था कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों और आगामी चुनावों की तैयारियों के कारण पार्टी के कई नेता अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। शुक्रवार को भी अखिलेश यादव के दिल्ली नहीं आने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उनका बलिया में कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बावजूद सपा के कई सांसद दिल्ली में मौजूद रह सकते हैं और राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के सांसद राजीव राय शामिल हो सकते हैं।
विपक्षी गठबंधन के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर साझा रणनीति बनानी है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी दलों के बीच समन्वय और प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान भी करना है। यदि प्रमुख सहयोगी दलों की नाराजगी बनी रहती है, तो इसका असर संयुक्त विरोध प्रदर्शन और आगे की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल, उद्धव ठाकरे गुट की गैरमौजूदगी और समाजवादी पार्टी के नेताओं की सीमित भागीदारी को लेकर सामने आ रही खबरों पर संबंधित दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इंडिया गठबंधन अपने आंतरिक मतभेदों को दूर कर साझा मुद्दों पर एकजुट रह पाता है या नहीं।