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शशि थरूर के ‘ड्रामा’ वाले बयान पर भड़के यूजर्स

नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे हुई तबाही के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। थरूर ने आपदा से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए उनके जल्द हालात से उबरने की कामना की, लेकिन पोस्ट में इस्तेमाल किए गए एक शब्द को […]

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  • August 27, 2026 2:45 pm IST, Published 28 minutes ago

नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे हुई तबाही के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। थरूर ने आपदा से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए उनके जल्द हालात से उबरने की कामना की, लेकिन पोस्ट में इस्तेमाल किए गए एक शब्द को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद उनके द्वारा प्राकृतिक आपदा के संदर्भ में इस्तेमाल किए गए ‘ड्रामा’ शब्द को लेकर है।

गुरुवार को तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने एक्स पर नेपाल की स्थिति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने बताया कि वह काठमांडू के लिए रवाना हुए थे और पहाड़ों में हुई उस घटना की भयावहता से अनजान थे, जिसने भारी तबाही मचाई। इसी पोस्ट में प्राकृतिक आपदा के लिए ‘ड्रामा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया।

थरूर की पोस्ट सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके शब्द चयन को असंवेदनशील बताया। लोगों का कहना था कि जब किसी प्राकृतिक आपदा में बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हो रहा हो, तब उसके लिए ‘ड्रामा’ जैसे शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। कई यूजर्स ने थरूर से पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्द को बदलने या पोस्ट को स्पष्ट करने की मांग की।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने वाले यूजर्स का मुख्य तर्क यह रहा कि बाढ़ और प्राकृतिक आपदा कोई प्रदर्शन या नाटकीय घटना नहीं है। यह लोगों के जीवन, घरों और रोजमर्रा की व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गंभीर स्थिति है। ऐसे में आपदा का वर्णन करते समय शब्दों का चयन संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। एक यूजर ने सवाल उठाया कि क्या प्रकृति के कहर को ‘ड्रामा’ कहना सही है। प्रतिक्रिया में शब्दों के अर्थ और उनके संदर्भ को लेकर भी टिप्पणी की गई। यूजर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी संवेदनशील घटना पर प्रतिक्रिया देते समय भाषा का विशेष ध्यान रखे।

एक अन्य यूजर ने भी थरूर की पोस्ट में इस्तेमाल शब्द पर सवाल उठाते हुए इसे बदलने की अपील की। प्रतिक्रिया में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान का संदर्भ भी दिया गया। यूजर ने कहा कि आपदा के समय नेताओं की संवेदना व्यक्त करने वाली भाषा लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती है। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों की पोस्ट कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाती हैं।

ऐसे में किसी भी बयान या पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों का अर्थ और संदर्भ तेजी से चर्चा का विषय बन सकता है। खासकर प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना या मानवीय त्रासदी जैसे मामलों में भाषा को लेकर लोगों की संवेदनशीलता अधिक होती है। नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित लोगों को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे समय में किसी सार्वजनिक व्यक्ति की ओर से की गई टिप्पणी पर लोगों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से तेज हो सकती है। थरूर की पोस्ट में आपदा पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई थी, लेकिन एक शब्द के इस्तेमाल ने पूरे संदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

थरूर की पोस्ट के बाद प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ यूजर्स ने उनके शब्द चयन को लेकर आलोचना की, जबकि बहस का केंद्र यही रहा कि सार्वजनिक मंचों पर संवेदनशील घटनाओं का उल्लेख करते समय भाषा कितनी सावधानी से इस्तेमाल की जानी चाहिए। नेपाल की प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि मानवीय त्रासदी से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक संवाद में भाषा की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के बयान आम लोगों के बीच व्यापक प्रभाव डालते हैं। इसलिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सहानुभूति और स्पष्टता के साथ बात रखना जरूरी माना जाता है।

 

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