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भारत में छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए वीजा अनिवार्य

 अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए लोगों पर लागू होंगे नए नियम नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारत में रह रहे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों के लिए वीजा संबंधी नियमों में बदलाव किया है। नए आदेश के तहत अब इन समुदायों के ऐसे लोगों को भारत में रहने […]

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  • November 6, 2026 9:04 am IST, Published 36 seconds ago

 अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए लोगों पर लागू होंगे नए नियम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारत में रह रहे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों के लिए वीजा संबंधी नियमों में बदलाव किया है। नए आदेश के तहत अब इन समुदायों के ऐसे लोगों को भारत में रहने के लिए निर्धारित श्रेणी का वीजा लेना अनिवार्य होगा, जिन्हें पहले पासपोर्ट और वीजा की शर्तों से छूट दी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना में यह व्यवस्था लागू की गई है।

नए नियम उन लोगों पर लागू होंगे, जो धार्मिक उत्पीड़न या उत्पीड़न की आशंका के कारण 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए थे। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके पास भारत आने के समय वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे या जिनके पासपोर्ट और वीजा की वैधता बाद में समाप्त हो गई थी।

छह समुदायों को लेकर बदले नियम

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, इस व्यवस्था के दायरे में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग शामिल हैं। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए इन समुदायों के लोगों को सितंबर 2025 में जारी आदेश के तहत पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट दी गई थी। हालांकि, नए बदलाव के बाद भारत में उनके प्रवास के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना जरूरी होगा।

सरकार ने यह बदलाव संबंधित कानूनी प्रावधानों को व्यवस्थित करने और नागरिकता तथा आव्रजन नियमों के बीच स्पष्टता लाने के उद्देश्य से किया है।

सीएए के अनुरूप किए गए बदलाव

नए आदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), 2019 से जुड़े प्रावधानों को भी ध्यान में रखा गया है। इसके साथ ही भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों की आवाजाही से संबंधित नियमों में भी बदलाव किए गए हैं।

अब भारत से नेपाल या भूटान जाने वाले भारतीय नागरिकों और इन दोनों देशों से भारत आने वाले नागरिकों को सरकार के निर्धारित वीजा मैनुअल के अनुसार मान्य पहचान दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

इसके अलावा, नेपाल और भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश की यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। ऐसे यात्रियों को वैध पासपोर्ट रखना होगा और निर्धारित आव्रजन जांच चौकियों यानी चेकपॉइंट से ही यात्रा करनी होगी।

नेपाल और भूटान के नागरिकों पर भी लागू होंगे नियम

नए प्रावधानों के तहत नेपाल और भूटान के नागरिकों को भी कुछ परिस्थितियों में वैध पासपोर्ट और वीजा प्रस्तुत करना होगा। यदि वे भारत के अलावा किसी तीसरे देश की यात्रा कर रहे हैं या चीन, पाकिस्तान, हांगकांग और मकाऊ के रास्ते भारत पहुंचते हैं, तो उनके लिए निर्धारित यात्रा दस्तावेज अनिवार्य होंगे।

इस बदलाव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होने वाली आवाजाही और आव्रजन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना है।

श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों को राहत जारी

केंद्र सरकार ने श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों और तिब्बती नागरिकों को पहले से मिल रही कुछ कानूनी छूटों को बरकरार रखा है। नए आदेश के अनुसार, 9 जनवरी 2015 तक भारत आए पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों के पास वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं होने की स्थिति में भी उनके खिलाफ केवल इसी आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इस तरह सरकार ने एक ओर कुछ विदेशी नागरिकों के लिए यात्रा और प्रवास संबंधी नियम सख्त किए हैं, वहीं दूसरी ओर पहले से भारत में रह रहे कुछ शरणार्थी समुदायों को दी गई कानूनी राहत जारी रखी है। नए प्रावधानों का असर भारत में रह रहे संबंधित समुदायों और सीमा पार यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ेगा।

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