चुनाव आयोग के इस फैसले के तहत दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और नगालैंड में विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उनके दस्तावेजों तथा उपलब्ध जानकारियों का मिलान करेंगे। जिन लोगों का नाम किसी वजह से मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका है, उनकी पात्रता की जांच की जाएगी। सत्यापन में योग्य पाए जाने वाले नागरिकों को अंतिम मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अवसर मिल सकेगा।
इस अभियान में विशेष रूप से उन मतदाताओं पर ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है। चुनाव आयोग इन श्रेणियों में दर्ज नामों की वास्तविक स्थिति की जांच कराना चाहता है, ताकि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न रह जाए। इसके साथ ही ऐसे नामों की पहचान भी की जाएगी, जो एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं या जिनकी जानकारी में बदलाव जरूरी है।
दरअसल, मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय के साथ कई लोग अपना निवास स्थान बदल लेते हैं, कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो जाती है और कई मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग स्थानों पर दर्ज हो जाता है। इन परिस्थितियों में मतदाता सूची को अपडेट करना जरूरी हो जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं को किसी तकनीकी या दस्तावेजी कारण से मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
घर-घर जाकर होने वाले सत्यापन के दौरान अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे मतदाताओं की उपलब्ध जानकारी का सही तरीके से मिलान करें। जिन लोगों को अनुपस्थित बताया गया है, उनसे दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, स्थानांतरित श्रेणी में दर्ज लोगों के वर्तमान पते और निवास की स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। मृत मतदाताओं के मामलों में संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जाएगा, जबकि डुप्लिकेट प्रविष्टियों की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
इस अभियान से उन नागरिकों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जो किसी कारणवश पहले चरण में अपनी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए थे। कई बार घर पर मौजूद नहीं होने, दस्तावेजों की कमी, पते में बदलाव या अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। ऐसे लोगों के लिए यह अभियान दोबारा अपनी पात्रता साबित करने का अवसर बन सकता है।
चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम छूटने न पाए। इसके लिए संबंधित राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों और बूथ स्तर के कर्मचारियों को सत्यापन प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नागरिकों से भी अपेक्षा की जाएगी कि वे अधिकारियों को सही जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना चुनाव में भागीदारी की पहली शर्त है। आयोग की इस पहल से एक ओर फर्जी और दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक मतदाताओं को सूची में शामिल होने का अवसर मिलेगा। फिलहाल सात राज्यों में प्रस्तावित इस घर-घर सत्यापन अभियान पर नजर रहेगी। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारी कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच पूरी करते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल दस्तावेजी या तकनीकी कमी के कारण अंतिम सूची से बाहर न रह जाए।