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क्या है छोटी दिवाली और क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

जानिए पूजा की विधि, महत्व और परंपराएं नई दिल्ली। दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व छोटी दिवाली हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन, भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की […]

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  • November 7, 2026 5:28 am IST, Published 6 minutes ago

जानिए पूजा की विधि, महत्व और परंपराएं

नई दिल्ली। दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व छोटी दिवाली हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन, भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा तथा सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है। छोटी दिवाली का पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है।

क्या है छोटी दिवाली और क्यों मनाई जाती है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं और आम लोगों को परेशान कर रखा था। उसने हजारों महिलाओं को बंदी बना लिया था। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।

इस पर्व को छोटी दिवाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य दीपावली से एक दिन पहले आता है। इस दिन से ही दीपोत्सव की रौनक और बढ़ जाती है।

छोटी दिवाली कैसे मनाई जाती है?

छोटी दिवाली के दिन घरों में कई पारंपरिक धार्मिक कार्य किए जाते हैं। प्रमुख परंपराएं इस प्रकार हैं:

  1. अभ्यंग स्नान: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान किया जाता है। इसे शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

  2. भगवान श्रीकृष्ण की पूजा: भगवान कृष्ण को फूल, फल और मिठाई अर्पित कर उनकी आराधना की जाती है।

  3. यमराज के नाम का दीपक: शाम को घर के बाहर दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना की जाती है।

  4. दीप जलाना: घर के मुख्य द्वार, आंगन और छत पर मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं।

  5. रंगोली और सजावट: घरों को फूलों, रंगोली और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है।

  6. मिठाइयां बांटना: परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।

रूप चौदस के नाम से भी प्रसिद्ध है छोटी दिवाली

छोटी दिवाली को कई क्षेत्रों में रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन सुबह स्नान और उबटन लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे शरीर की शुद्धि होती है और व्यक्ति को सुंदरता तथा सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

छोटी दिवाली का सामाजिक संदेश

छोटी दिवाली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें अपने जीवन से बुराइयों, नकारात्मक विचारों और अहंकार को दूर करने की प्रेरणा भी देता है। यह पर्व संदेश देता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंत में सत्य और अच्छाई की ही जीत होती है।

इस अवसर पर लोगों को पर्यावरण का ध्यान रखते हुए मिट्टी के दीपक जलाने और पटाखों से होने वाले प्रदूषण से बचने का प्रयास करना चाहिए।

2026 में कब है छोटी दिवाली?

वर्ष 2026 में छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण छोटी दिवाली और मुख्य दीपावली एक ही दिन पड़ रही हैं। नई दिल्ली में अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक बताया गया है।

छोटी दिवाली का पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में प्रकाश, प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक सोच का हमेशा स्वागत करना चाहिए। यही इस पर्व का वास्तविक संदेश है।
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