गुवाहाटी। मणिपुर में नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में 10 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने 24 घंटे का कर्फ्यू लागू किया। तनाव को देखते हुए बाजार बंद रहे और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं।
पुलिस और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य हिंसा को फैलने से रोकना, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हमलों में शामिल संदिग्धों को पकड़ना है। हालांकि, लगातार हो रही गोलीबारी और गांवों में हमलों की खबरों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), असम राइफल्स, कोबरा बटालियन और मणिपुर पुलिस कमांडो की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। पुलिस के मुताबिक, माकुई अशांग, तपोन और चसाड जैसे संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध उपद्रवियों की तलाश के लिए घर-घर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
11 अक्टूबर की रात कांगपोकपी जिले के माकुई अशांग और तपोन नगा गांवों में हमलों के दौरान मारे गए लोगों के शव सुरक्षा घेरे में मॉर्चरी लाए गए। इन घटनाओं के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को कुकी-बहुल गांव चसाड में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। अलग-अलग घटनाओं में कई लोगों की जान गई।
स्थानीय लोगों ने रातभर गोलीबारी होने की बात कही है। उनका कहना है कि भारी संख्या में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद सीमावर्ती और बफर जोन के आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है।
हालांकि, हिंसा की प्रत्येक घटना में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्थानीय निवासी डेविड जॉन्सन के अनुसार, लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इसके बावजूद गोलीबारी की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
रिपोर्ट में 24 सितंबर को पिलोंग में तांगखुल नगा समुदाय के लोगों की हत्या के मामले में कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) और म्यांमार स्थित पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) के कुछ गुटों के नाम सामने आने का उल्लेख किया गया है। शनिवार को सीमा स्तंभ 102 के पास चसाड में KNA-B के तीन उग्रवादियों के मारे जाने की भी जानकारी दी गई है।
म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से सीमा पार उग्रवादी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि, किसी संगठन की संलिप्तता से संबंधित दावों की पुष्टि जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी जरूरी है।
नगा और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष पहले मुख्य रूप से उखरुल जिले तक सीमित बताया जाता था, लेकिन अब कांगपोकपी, कामजोंग, सेनापति, तामेंगलोंग और नोनी के कुछ हिस्सों में भी तनाव की घटनाएं सामने आई हैं।
इन क्षेत्रों में दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। मौजूदा विवाद में एक-दूसरे पर उग्रवादियों को शरण देने और क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि निर्दोष लोगों को निशाना न बनाया जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में दोबारा हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है।
मणिपुर में बार-बार हो रही हिंसा ने आम लोगों की सुरक्षा, आवागमन और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित किया है। कर्फ्यू और सुरक्षा बलों की तैनाती तत्काल हिंसा को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है, लेकिन स्थायी शांति के लिए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और समुदायों के बीच संवाद भी जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मणिपुर में हिंसा का सिलसिला कब थमेगा और लोगों को सुरक्षित जीवन जीने का भरोसा कब मिलेगा। प्रशासन के सामने चुनौती केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का विश्वास बहाल करने और दोनों समुदायों के बीच तनाव कम करने की भी है।