असम में दूसरी शादी की तो जाएगी सरकारी नौकरी, CM का बड़ा फैसला

हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने सेवा नियमों में संशोधन को दी मंजूरी, बहुविवाह के दोषी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के साथ भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए भी किया जाएगा अयोग्य।

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  • November 4, 2026 8:30 pm IST, Published 1 hour ago

गुवाहाटी। असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राज्य सरकार ने बहुविवाह यानी एक से अधिक शादी करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है। नए फैसले के तहत बहुविवाह के दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जा सकेगा। इतना ही नहीं, ऐसे कर्मचारियों को भविष्य में भी असम सरकार की किसी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 3 नवंबर को कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी, जिसके बाद 4 नवंबर को यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।

सरकार के इस फैसले को महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सरकारी सेवा में अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह प्रावधान किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होगा। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत सभी समुदायों के सरकारी कर्मचारियों पर यह व्यवस्था समान रूप से लागू होगी।

क्या है सरकार का नया नियम और किसे होगा इसका असर?

असम कैबिनेट ने 3 नवंबर 2026 को हुई बैठक में असम सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1964 में संशोधन को मंजूरी दी है। इस संशोधन के तहत नियम 7 में नया खंड 6 जोड़ा गया है। इसके माध्यम से बहुविवाह को सरकारी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरी शादी करता है और जांच में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उसे भविष्य में राज्य सरकार की नौकरी के लिए भी अयोग्य घोषित किया जाएगा।

यह फैसला केवल चेतावनी या सामान्य विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी सेवा से बाहर करने जैसा कठोर दंड शामिल है। हालांकि, किसी कर्मचारी को दोषी ठहराने और बर्खास्त करने की प्रक्रिया निर्धारित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत ही पूरी की जाएगी। इसलिए केवल आरोप लगने से किसी कर्मचारी की नौकरी स्वतः समाप्त नहीं होगी।

सभी धर्मों के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा नियम

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि सरकार का यह फैसला किसी विशेष धर्म या समुदाय के कर्मचारियों को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया है। इसे समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में लागू व्यवस्था से जोड़ते हुए सभी समुदायों के सरकारी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू करने की बात कही गई है।

इसका मतलब है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित सभी समुदायों के कर्मचारी इस नियम के दायरे में आएंगे। सरकार का तर्क है कि सरकारी सेवा में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को निर्धारित सेवा नियमों का पालन करना चाहिए।

इस फैसले के बाद सरकारी कर्मचारियों के वैवाहिक जीवन और सेवा संबंधी नियमों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खासकर उन मामलों में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कर्मचारी पहली शादी के रहते दूसरी शादी कर लेते हैं और विभाग को इसकी जानकारी नहीं होती।

2023 में भी जारी हुआ था सरकार का आदेश

असम सरकार ने बहुविवाह के मामलों को लेकर पहले भी सख्त रुख अपनाया था। 20 अक्टूबर 2023 को राज्य के कार्मिक विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें असम सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 26 का उल्लेख करते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए दूसरी शादी से संबंधित शर्तें स्पष्ट की गई थीं।

इस आदेश के अनुसार, यदि किसी सरकारी कर्मचारी की पत्नी जीवित है तो वह सरकार की पूर्व अनुमति के बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता, भले ही उस समय लागू व्यक्तिगत कानून में ऐसी शादी की अनुमति क्यों न हो। इसी तरह, किसी महिला सरकारी कर्मचारी को ऐसे व्यक्ति से शादी करने से पहले सरकारी अनुमति लेनी होगी, जिसकी पत्नी पहले से जीवित है।

सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। अब नवंबर 2026 में कैबिनेट द्वारा मंजूर संशोधन ने इस मामले में बर्खास्तगी और भविष्य की सरकारी नौकरी से अयोग्यता जैसे कठोर दंड का प्रावधान सामने रखा है।

महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को बताया गया उद्देश्य

असम सरकार ने इस कदम को महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय से जोड़कर देखा है। सरकार का मानना है कि बहुविवाह के कारण कई बार महिलाओं को पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

विशेष रूप से उन महिलाओं की स्थिति गंभीर हो जाती है, जिन्हें पति द्वारा दूसरी शादी करने के बाद आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के मामले में अकेला छोड़ दिया जाता है। ऐसे मामलों में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा बन जाता है।

राज्य सरकार का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों से समाज में जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। इसलिए सेवा में रहते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान जरूरी है।

सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी हुई थी घोषणा

इस मुद्दे पर असम सरकार ने जुलाई 2026 में पेश किए गए बजट के दौरान भी अपना रुख स्पष्ट किया था। वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बहुविवाह करने वाले पुरुषों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं देने से संबंधित प्रस्ताव की घोषणा की थी।

उस समय इस प्रस्ताव को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा हुई थी। अब नवंबर में कैबिनेट द्वारा सेवा नियमों में संशोधन की मंजूरी मिलने के बाद यह विषय फिर से सुर्खियों में है।

हालांकि, कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित बजट प्रस्ताव और सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी का नया सेवा नियम अलग-अलग प्रावधान हैं। इनके लागू होने की शर्तों और संबंधित सरकारी आदेशों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

कर्मचारियों के लिए क्या हैं इस फैसले के मायने?

असम सरकार के इस फैसले का सीधा असर राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा। अब कर्मचारियों को अपने वैवाहिक जीवन से जुड़े मामलों में भी निर्धारित सेवा नियमों का ध्यान रखना होगा।

इस फैसले से सरकारी विभागों में कर्मचारियों के आचरण और अनुशासन से जुड़े मामलों की जांच को भी अधिक महत्व मिलने की संभावना है। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ बहुविवाह की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित विभाग नियमानुसार जांच और कार्रवाई कर सकेगा।

हालांकि, ऐसे मामलों में वैवाहिक स्थिति, कानूनी दस्तावेज, पूर्व विवाह, तलाक, सरकारी अनुमति और संबंधित परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

इसलिए कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल व्यक्तिगत कानून का हवाला देना सरकारी सेवा नियमों से छूट मिलने की गारंटी नहीं है। असम सरकार के 2023 के आदेश में भी सरकारी अनुमति की शर्त स्पष्ट की गई थी।

कैबिनेट की अन्य घोषणाएं भी रहीं महत्वपूर्ण

3 नवंबर की कैबिनेट बैठक में केवल बहुविवाह से संबंधित फैसला ही नहीं लिया गया, बल्कि राज्य के विकास और रोजगार से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

इनमें पूर्व सैनिकों को सरकारी नौकरियों में अधिक अवसर देने का फैसला प्रमुख रहा। राज्य सरकार ने ग्रेड-3 और ग्रेड-4 के पदों पर भर्ती के लिए पूर्व सैनिकों को अधिकतम आयु सीमा में छूट बढ़ाकर 45 वर्ष तक करने की मंजूरी दी है।

इसके अलावा, राज्य में रोपवे विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड और असम सरकार के बीच समझौते को मंजूरी दी गई। इसमें कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर तक 1.43 किलोमीटर और खानापाड़ा से गुवाहाटी रेलवे स्टेशन तक 11 किलोमीटर के रोपवे मार्ग की योजना शामिल है।

कैबिनेट ने नेल्ली में लगभग 6,000 बीघा जमीन पर राज्य का पहला डिफेंस पार्क स्थापित करने से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त किसानों के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त सहायता देने का फैसला भी किया गया, जिससे कुल राशि 2,640 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी।

देशभर में चर्चा का विषय बना असम सरकार का फैसला

असम सरकार का यह फैसला सरकारी सेवा में अनुशासन, महिलाओं के अधिकार और वैवाहिक कानूनों को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है। एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसके कानूनी प्रावधानों, विभागीय जांच और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी चर्चा होना स्वाभाविक है।

फिलहाल इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि असम सरकार ने बहुविवाह के दोषी सरकारी कर्मचारियों के लिए बर्खास्तगी और भविष्य में सरकारी नौकरी से अयोग्यता जैसे कड़े दंड का प्रावधान मंजूर किया है। आने वाले समय में इसके क्रियान्वयन और विभागीय कार्रवाई से जुड़े मामलों पर देशभर की नजर रहेगी।

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