नई दिल्ली। मणिपुर में जातीय तनाव के बीच एक बार फिर हिंसा की घटना सामने आई है। नोनी जिले के एक पहाड़ी गांव में शनिवार सुबह दो विरोधी गुटों के बीच हुई भीषण गोलीबारी में कुकी समुदाय के तीन लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, गोलीबारी नोनी जिले के जंगली पहाड़ी क्षेत्र में स्थित केकरू नगा गांव में हुई। दोनों पक्षों के बीच कई घंटों तक लगातार गोलियां चलने की बात सामने आई है। इस घटना में मारे गए तीनों लोग कुकी समुदाय से संबंधित थे।
कुकी समुदाय के प्रमुख संगठन कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) ने इस घटना के लिए नगा उग्रवादी गुटों को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन ने सरकार से आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह और गोलीबारी में शामिल लोगों की पहचान को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
गोलीबारी की घटना के बीच शनिवार को मणिपुर की राजधानी इम्फाल में मैतेई संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए संघर्षविराम समझौते को रद्द करने की मांग उठाई।
यह रैली मणिपुर इंटीग्रिटी के समन्वयक संगठन की ओर से आयोजित की गई थी। इसे कई नगा संगठनों का समर्थन भी मिला। नगा संगठनों की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘मणिपुर बचाओ’ लिखे पोस्टर और तख्तियां थीं। इनके माध्यम से शांति, न्याय और स्थानीय लोगों की सुरक्षा की मांग की गई। चंदेल और सेनापति जिलों में भी नगा संगठनों ने रैलियां निकालीं।
प्रदर्शन के दौरान कुकी उग्रवादी समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन (एसओओ) समझौते को रद्द करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। यह समझौता कुकी उग्रवादी संगठनों और सरकार के बीच हिंसा रोकने तथा बातचीत का रास्ता बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था।
हालांकि, हाल के घटनाक्रमों के बाद इस समझौते के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि समझौता 4 सितंबर को बिना नवीनीकरण के समाप्त हो गया था। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों को लेकर विवाद और गहरा गया है।
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। घाटी में मुख्य रूप से मैतेई समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों में कुकी समुदाय के लोग रहते हैं। दोनों समुदायों के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब तक सैकड़ों लोगों की जान ले चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा में कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं।
इसके अलावा, इस साल फरवरी से कुकी और नगा समुदायों के बीच हुई झड़पों में भी करीब 50 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है।
हाल ही में सुरक्षा बलों ने कुकी उग्रवादियों से जुड़े एक शिविर पर कब्जा किया था। बताया गया कि शिविर के अभिलेखों में 159 उग्रवादियों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर केवल एक व्यक्ति मौजूद मिला। इस घटना के बाद संघर्षविराम समझौते के पालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हुए।
मणिपुर में लगातार हो रही हिंसक घटनाएं राज्य में शांति बहाली की चुनौती को और गंभीर बना रही हैं। अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास, विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण हालात सामान्य होने में मुश्किलें आ रही हैं।
नोनी जिले की ताजा गोलीबारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को कितनी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली के प्रयासों पर है।