याचिकाकर्ता गणेश कुमार ने अपनी याचिका में सौरभ दास का उल्लेख ‘योगेश शर्मा उर्फ सौरभ दास’ के रूप में किया है। उनका कहना है कि सौरभ दास की वास्तविक पहचान और नागरिकता से जुड़े तथ्यों की जांच होनी चाहिए। याचिका में उनके माता-पिता और पारिवारिक पृष्ठभूमि से संबंधित जानकारी की भी पड़ताल कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता चाहता है कि संबंधित सरकारी एजेंसियां उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर उनकी पहचान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। मामले में एक और महत्वपूर्ण मांग सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी है। याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सौरभ दास के नाम से संचालित एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि यदि जांच के दौरान उनकी नागरिकता को लेकर कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में सौरभ दास विदेशी नागरिक पाए जाते हैं तो उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड की वैधता की समीक्षा की जाए। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार इन्हें रद्द करने की कार्रवाई भी की जाए। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई किसी आरोप के आधार पर अपने आप नहीं की जा सकती। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सौरभ दास की पहचान और पते से संबंधित कुछ दस्तावेज अदालत के सामने रखे। पीठ ने इन दस्तावेजों का अवलोकन किया और उनमें दर्ज कुछ जानकारियों को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा। इसके बाद अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सौरभ दास पिछले कुछ महीनों से कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहे हैं। उनके संगठन की ओर से किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों ने भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। अब उनकी कथित पहचान को लेकर अदालत में मामला पहुंचने के बाद यह विवाद एक नए मोड़ पर आ गया है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक अदालत ने सौरभ दास को लेकर लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। न ही उनकी नागरिकता या वास्तविक नाम को लेकर किसी तरह की पुष्टि हुई है। फिलहाल अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और आगे की सुनवाई में दस्तावेजों तथा दलीलों के आधार पर मामले पर विचार किया जाएगा। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर रहेगी। सौरभ दास को भी अदालत में अपना पक्ष रखने और अपनी पहचान तथा नागरिकता से संबंधित तथ्यों पर स्पष्टीकरण देने का अवसर मिलेगा। जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि याचिका में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक इन दावों को अप्रमाणित आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।