गाजियाबाद: बाजार में सस्ते दाम पर मिलने वाला पनीर आपकी सेहत पर कितना भारी पड़ सकता है, इसका चौंकाने वाला मामला गाजियाबाद जिले से सामने आया है। भोजपुर थाना क्षेत्र के नाहली गांव में पनीर तैयार करने वाली तीन फैक्ट्रियों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी के दौरान बड़े पैमाने पर मिलावट का खुलासा होने का दावा किया गया है। कार्रवाई के दौरान टीम ने करीब 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया मौके पर ही नष्ट कराया। इसके अलावा अलग-अलग संदिग्ध पदार्थों के 20 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
बताया जा रहा है कि इन फैक्ट्रियों में पनीर को अधिक सफेद, आकर्षक और वजनदार दिखाने के लिए कई तरह की चीजों के इस्तेमाल की आशंका सामने आई है। प्रारंभिक कार्रवाई में कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाले वाइटनर, पामोलीन ऑयल, दूध पाउडर और अन्य संदिग्ध केमिकल का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन पदार्थों की वास्तविक मात्रा और खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकेगी।
सस्ता पनीर खरीदने वालों के लिए बड़ी चेतावनी
पनीर भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। घरों से लेकर होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों तक इसकी मांग लगातार बनी रहती है। यही वजह है कि इसकी कीमत कम रखने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कुछ जगहों पर मिलावट का सहारा लेने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
नाहली गांव में हुई कार्रवाई ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि बाजार में मिलने वाले पनीर की गुणवत्ता की जांच कितनी जरूरी है। अगर किसी खाद्य पदार्थ में गैर-खाद्य पदार्थ या औद्योगिक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है तो यह उपभोक्ताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
छापेमारी में 868 किलो पनीर नष्ट
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार रात तीन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में तैयार पनीर और खोया बरामद किया गया। विभागीय टीम ने मौके पर ही करीब 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया नष्ट कराया।
इस कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध और संभावित रूप से मिलावटी खाद्य सामग्री को बाजार में पहुंचने से रोकना बताया गया है। बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री नष्ट किए जाने से यह भी साफ होता है कि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की।
पनीर को सफेद और वजनदार बनाने का आरोप
सामने आई जानकारी के अनुसार, फैक्ट्रियों में पनीर को ज्यादा सफेद और वजनदार बनाने के लिए ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है, जिनका खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कपड़े धोने वाले वाइटनर के साथ पामोलीन ऑयल, दूध पाउडर और अन्य रसायनों का भी उल्लेख है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल किसी पदार्थ के फैक्ट्री परिसर में मिलने से यह साबित नहीं होता कि उसका इस्तेमाल पनीर में किया गया था। इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच इसी वजह से अहम मानी जा रही है।
20 नमूने जांच के लिए भेजे गए
कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों और संदिग्ध सामग्री के करीब 20 नमूने लिए। इन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
लैब रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि पनीर और खोया में वास्तव में कौन-कौन से पदार्थ मौजूद थे और उनकी मात्रा कितनी थी। इसके बाद संबंधित फैक्ट्रियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
आखिर पनीर में मिलावट क्यों की जाती है?
पनीर बनाने में दूध प्रमुख कच्चा माल होता है और इसकी लागत भी उत्पादन का बड़ा हिस्सा होती है। ऐसे में कुछ कारोबारी कम लागत में ज्यादा मात्रा तैयार करने के लिए दूध की जगह दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल करने या तैयार उत्पाद का वजन बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
पनीर को ज्यादा सफेद दिखाना भी उपभोक्ताओं को आकर्षित करने का एक तरीका माना जाता है। आम ग्राहक अक्सर चमकदार और बेहद सफेद पनीर को बेहतर गुणवत्ता का समझ लेता है। यही धारणा मिलावटखोरों के लिए फायदा उठाने का रास्ता बन सकती है।
ग्राहक कैसे पहचानें संदिग्ध पनीर?
हर सफेद पनीर मिलावटी हो, यह जरूरी नहीं है। फिर भी उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय कुछ सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए। बहुत ज्यादा चमकीला या असामान्य रूप से सफेद पनीर देखकर तुरंत उसे अच्छी गुणवत्ता का नहीं मानना चाहिए।
पनीर की बनावट, गंध और स्वाद में असामान्यता महसूस होने पर उसे खाने से बचना बेहतर है। खुले में बिकने वाले पनीर की जगह विश्वसनीय दुकान या प्रमाणित ब्रांड से खरीदारी करना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प हो सकता है। पैकेट वाले उत्पाद खरीदते समय लेबल, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी भी देखनी चाहिए।
जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
गाजियाबाद की इस कार्रवाई ने मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर लखनऊ भेजे गए 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पनीर में किन पदार्थों की मौजूदगी थी और संबंधित फैक्ट्रियों में खाद्य सुरक्षा मानकों का कितना उल्लंघन हुआ।
इस मामले से उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ा संदेश सामने आया है—सिर्फ सस्ता और देखने में आकर्षक पनीर खरीदना पर्याप्त नहीं है, उसकी गुणवत्ता और स्रोत पर भी ध्यान देना जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।