सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नकली करेंसी से जुड़े मामलों के बीच अब नकली सिक्कों का मामला सामने आया है। पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में 20 रुपये के नकली सिक्कों की करीब 1.20 लाख रुपये मूल्य की खेप बरामद की गई है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती पूछताछ में नकली सिक्कों को बाजार में खपाने के लिए कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सप्लायर और अन्य संभावित आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
20 रुपये के नकली सिक्कों की बड़ी खेप बरामद
जानकारी के मुताबिक, सहारनपुर नगर कोतवाली और एसओजी की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आवास विकास कॉलोनी निवासी कुलदीप और विपिन को पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 20 रुपये मूल्यवर्ग के बड़ी संख्या में नकली सिक्के बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार बरामद सिक्कों की कुल कीमत करीब 1 लाख 20 हजार रुपये है।
इस बरामदगी ने पुलिस की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि सिक्के रोजमर्रा के छोटे-बड़े लेनदेन में बड़ी संख्या में इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में नकली सिक्कों को असली मुद्रा के साथ बाजार में मिलाकर चलाने की कोशिश आम लोगों और दुकानदारों दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
4 हजार के नकली सिक्के चलाने पर 400 रुपये कमीशन
पूछताछ में पुलिस को नकली सिक्कों को बाजार में चलाने के लिए बनाए गए कथित कमीशन सिस्टम की जानकारी मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी कुलदीप ने पूछताछ में बताया कि उसे 4,000 रुपये के नकली सिक्के बाजार में चलाने के बदले 400 रुपये कमीशन दिया जाता था।
यानी नकली सिक्कों को बाजार में खपाने के लिए करीब 10 प्रतिशत कमीशन का खेल चल रहा था। इस खुलासे के बाद पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों को नकली सिक्के कौन उपलब्ध कराता था और उनके पीछे इस नेटवर्क को संचालित करने वाले लोग कौन हैं।
क्या दुकानदारों तक पहुंच चुके हैं नकली सिक्के?
जांच में पुलिस इस अहम सवाल का जवाब भी तलाश रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कितने नकली सिक्के बाजार में चलाए हैं। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली सिक्कों का इस्तेमाल किन दुकानों, छोटे कारोबारियों या अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों में किया गया।
पुलिस को आशंका है कि कमीशन के आधार पर अगर कई लोगों को नकली सिक्के बाजार में चलाने के लिए लगाया गया था, तो पहले भी ऐसी खेप अलग-अलग इलाकों में पहुंचाई गई हो सकती है। इसलिए पूछताछ के दौरान आरोपियों के संपर्कों और उनके संभावित लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
मुख्य सप्लायर की तलाश में पुलिस की दबिश
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला लक्ष्य उस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचना है, जिसने कथित तौर पर नकली सिक्कों की सप्लाई की। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये सिक्के कहां तैयार किए गए, किस माध्यम से सहारनपुर तक पहुंचे और इनके पीछे कितने लोग सक्रिय हैं।
पूछताछ में सामने आए सुरागों के आधार पर संभावित ठिकानों पर दबिश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी खुद नकली सिक्के तैयार करते थे या केवल उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाकर बाजार में खपाने का काम करते थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्य सप्लायर और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
नकली नोटों के मामले के बीच सिक्कों ने बढ़ाई चिंता
सहारनपुर में नकली सिक्कों की यह बरामदगी ऐसे समय सामने आई है जब जिले में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से जुड़े 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों के मामले की जांच भी चल रही है। इस बड़े मामले में जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य पहलुओं को खंगाल रही हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर नकली सिक्कों के मामले और PNB से जुड़े नकली नोट मामले के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग जांच के रूप में देखना जरूरी है। नकली सिक्कों के मामले में फिलहाल पुलिस का फोकस सप्लायर, निर्माण के स्रोत और बाजार में पहुंची संभावित अन्य खेपों का पता लगाने पर है।
आम लोगों और दुकानदारों के लिए जरूरी सावधानी
नकली सिक्कों की बरामदगी के बाद आम लोगों और दुकानदारों को लेनदेन के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। खासतौर पर बड़ी संख्या में एक जैसे सिक्के प्राप्त होने पर उनकी जांच करना जरूरी हो सकता है। किसी सिक्के की प्रामाणिकता को लेकर संदेह होने पर उसे आगे चलाने के बजाय संबंधित बैंक या सक्षम अधिकारी से सत्यापन कराना बेहतर है।
छोटे मूल्यवर्ग के सिक्के रोजाना बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होते हैं, इसलिए नकली सिक्कों की पहचान और उनकी रिपोर्टिंग महत्वपूर्ण हो जाती है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर यह साफ हो सकता है कि बरामद 1.20 लाख रुपये की खेप स्थानीय स्तर के किसी छोटे नेटवर्क का हिस्सा थी या इसके पीछे दूसरे शहरों तक फैला कोई बड़ा सप्लाई तंत्र काम कर रहा था।
फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी और नकली 20 रुपये के सिक्कों की बरामदगी के बाद पुलिस की जांच जारी है। मुख्य सप्लायर कौन है, सिक्के कहां से आए और अब तक कितने सिक्के बाजार में पहुंच चुके हैं, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।