मोबाइल मांगने पर मां का गला दबाया, 11 साल की छात्रा भागी

गोरखपुर: मोबाइल फोन की बढ़ती लत बच्चों और किशोरों के व्यवहार को किस तरह प्रभावित कर रही है, इसका एक हैरान करने वाला मामला गोरखपुर से सामने आया है। तिवारीपुर क्षेत्र में रहने वाली 11 वर्षीय कक्षा छह की छात्रा ने देर रात मोबाइल फोन मांगने को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर […]

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  • August 8, 2026 9:21 pm IST, Published 1 hour ago

गोरखपुर: मोबाइल फोन की बढ़ती लत बच्चों और किशोरों के व्यवहार को किस तरह प्रभावित कर रही है, इसका एक हैरान करने वाला मामला गोरखपुर से सामने आया है। तिवारीपुर क्षेत्र में रहने वाली 11 वर्षीय कक्षा छह की छात्रा ने देर रात मोबाइल फोन मांगने को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर अपनी मां का गला दबाने का प्रयास किया। इसके बाद वह घर से निकलकर बिहार चली गई। परिवार की सूचना पर पुलिस ने करीब 72 घंटे बाद बच्ची को बिहार में रहने वाले एक रिश्तेदार के घर से बरामद कर लिया।

यह मामला सामने आने के बाद मोबाइल फोन के बच्चों के बीच बढ़ते इस्तेमाल, स्क्रीन टाइम और उसके कारण होने वाले व्यवहारिक बदलाव को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है।

देर रात मोबाइल मांगने को लेकर हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, तिवारीपुर क्षेत्र के किराये के मकान में रहने वाला परिवार मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले का रहने वाला है। परिवार के मुखिया सऊदी अरब में नौकरी करते हैं। परिवार में बेटा और बेटी दोनों शहर के एक निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। बेटा कक्षा नौ और बेटी कक्षा छह की छात्रा है।

बताया गया कि तीन अगस्त की रात करीब 11 बजे बच्ची ने अपनी मां से मोबाइल फोन मांगा। उस समय काफी देर हो चुकी थी और अगले दिन पढ़ाई भी थी। मां ने देर रात मोबाइल देने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर बच्ची नाराज हो गई।

परिवार के अनुसार, विवाद बढ़ने पर बच्ची ने कथित तौर पर अपनी मां का गला दबाने का प्रयास किया। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह स्थिति को संभाला। पड़ोसियों और मकान मालिक ने बच्ची को समझाया। कुछ देर बाद वह शांत भी हो गई, लेकिन इसके बावजूद बार-बार घर छोड़ने की बात कहती रही।

घर से निकलते समय साथ था छोटा बैग

चार अगस्त की शाम करीब पांच बजे बच्ची चुपचाप घर से निकल गई। उसके पास काले रंग का एक छोटा बैग था। जब वह देर शाम तक घर नहीं लौटी तो परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की।

पहले आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई। परिचितों, रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर भी जानकारी जुटाई गई, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला। इसके बाद परिवार ने तिवारीपुर थाने में बच्ची के गुमशुदा होने की सूचना दी।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची की तलाश शुरू कर दी। परिवार के सदस्यों से बातचीत के साथ-साथ पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का प्रयास किया। बच्ची के मोबाइल से जुड़े इनपुट और रिश्तेदारों से मिली जानकारी को भी जांच में शामिल किया गया।

पुलिस ने 72 घंटे बाद बिहार से बरामद किया

परिवार की चिंता उस समय और बढ़ गई जब कई घंटे बीतने के बाद भी बच्ची के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। पुलिस ने संभावित स्थानों की जांच करते हुए रिश्तेदारों से भी संपर्क किया।

करीब 72 घंटे बाद पुलिस टीम ने बच्ची को बिहार में रहने वाले एक रिश्तेदार के घर से बरामद कर लिया। इसके बाद उसे सुरक्षित गोरखपुर लाया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घर से निकलने के बाद बच्ची किन परिस्थितियों में बिहार पहुंची और इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रही।

पुलिस ने बच्ची और उसके परिवार से मिली जानकारी को जांच में शामिल किया है। मामले में किसी आपराधिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

मोबाइल से बातचीत की भी जांच

बच्ची की मां ने पुलिस को बताया कि घर से निकलने से पहले बच्ची मोबाइल फोन पर किसी से बातचीत कर रही थी। पुलिस को डायलर में एक युवक का नाम दिखाई देने की बात भी सामने आई है।

इसके बाद परिवार ने आशंका जताई कि बच्ची की किसी सहपाठी या उससे जुड़े कुछ लड़कों से बातचीत हो सकती है। हालांकि, यह केवल परिवार की आशंका है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस मोबाइल से जुड़े इनपुट, सीसीटीवी फुटेज और रिश्तेदारों से मिली जानकारी के आधार पर पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि बच्ची घर से निकलने के बाद किन रास्तों से बिहार पहुंची।

बच्चों में बढ़ता मोबाइल इस्तेमाल बना चिंता का विषय

इस घटना ने बच्चों में स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। मोबाइल आज पढ़ाई, ऑनलाइन जानकारी और संचार का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है, लेकिन कम उम्र में इसका अनियंत्रित इस्तेमाल कई बार व्यवहार में बदलाव का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर अचानक सख्ती करने के बजाय माता-पिता को उनकी दिनचर्या, पढ़ाई, मनोरंजन और ऑनलाइन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वे किसी समस्या या ऑनलाइन संपर्क के बारे में बिना डर के परिवार को बता सकें।

हालांकि, इस घटना को केवल मोबाइल की लत से जोड़कर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। बच्ची के व्यवहार के पीछे अन्य पारिवारिक, सामाजिक या व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं। इसलिए पुलिस जांच के साथ-साथ परिवार के स्तर पर भी बच्ची की काउंसलिंग और उसकी बात समझना महत्वपूर्ण होगा।

परिवार और पुलिस दोनों के लिए कई सवाल

बच्ची की बरामदगी के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर 11 साल की बच्ची इतनी देर रात मोबाइल के लिए विवाद की स्थिति तक कैसे पहुंची? घर छोड़ने का फैसला उसने क्यों लिया? वह अकेले बिहार स्थित रिश्तेदार के घर तक कैसे पहुंची? और घर से निकलने से पहले मोबाइल पर वह किससे बात कर रही थी?

इन सवालों के जवाब पुलिस जांच में सामने आ सकते हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करना और घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को समझना है।

नोट: इस खबर में बच्ची की पहचान उजागर नहीं की गई है। नाबालिग से जुड़े मामलों में उसकी निजता और सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है।

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