तीन बार विधायक बने उमाशंकर सिंह का निधन, राजनीति में शोक

बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बुधवार की रात बेहद दुखद रही। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और […]

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  • August 6, 2026 7:30 pm IST, Published 31 minutes ago

बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बुधवार की रात बेहद दुखद रही। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और पिछले कुछ समय से उनका इलाज राष्ट्रीय राजधानी में चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही बलिया समेत पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों की भारी भीड़ उनके पैतृक आवास पर पहुंचने लगी।

उमाशंकर सिंह बसपा के ऐसे नेता थे जिन्होंने पार्टी के कठिन दौर में भी अपनी राजनीतिक पकड़ कायम रखी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और प्रदेशभर में पार्टी केवल एक ही सीट जीत सकी, तब रसड़ा विधानसभा से उमाशंकर सिंह ने जीत दर्ज कर पार्टी की साख बचाई। यही वजह रही कि उन्हें बसपा का सबसे मजबूत चेहरा माना जाता था।

कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद हुआ निधन

जानकारी के अनुसार उमाशंकर सिंह पिछले लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। तमाम प्रयासों के बावजूद बुधवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर फैल गई।

राजनीतिक दलों ने जताया गहरा शोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। बसपा प्रमुख मायावती ने भी उनके निधन को पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन

उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के नगरा ब्लॉक के खनवर गांव में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय चुरहू सिंह सेना से सेवानिवृत्त थे। स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करने वाले उमाशंकर सिंह ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। बलिया के सतीश चंद्र महाविद्यालय में छात्रसंघ के महामंत्री चुने जाने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

इसके बाद उन्होंने वर्ष 2002-03 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में चुनाव जीता। स्थानीय राजनीति में लगातार सक्रिय रहते हुए उन्होंने जनता के बीच मजबूत पहचान बनाई। यही जनाधार आगे चलकर उन्हें विधानसभा तक लेकर गया।

2012 में पहली जीत से बने बड़ा राजनीतिक चेहरा

वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने उमाशंकर सिंह को रसड़ा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सनातन पांडेय को 84 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें पूर्वांचल की राजनीति का प्रभावशाली चेहरा बना दिया।

2017 और 2022 में भी कायम रखा विजय अभियान

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बावजूद उमाशंकर सिंह ने अपनी सीट बचाए रखी। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी राम इकबाल सिंह को करीब 33 हजार मतों से हराकर लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचने का गौरव हासिल किया।

इसके बाद वर्ष 2022 के चुनाव में भी उन्होंने समाजवादी पार्टी और सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशी को पराजित कर लगातार तीसरी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया। खास बात यह रही कि जब बसपा पूरे प्रदेश में केवल एक सीट जीत सकी, तब उमाशंकर सिंह की जीत ने उन्हें पार्टी का सबसे मजबूत विधायक बना दिया।

जनता के बीच मजबूत पकड़ थी उनकी पहचान

उमाशंकर सिंह को क्षेत्र में विकास कार्यों और जनता से सीधे संवाद के लिए जाना जाता था। वह नियमित रूप से अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा करते थे और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखते थे। यही कारण था कि विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उनका जनाधार लगातार मजबूत बना रहा।

समर्थकों में शोक, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

उनके निधन की खबर मिलते ही बलिया जिले के रसड़ा, नगरा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचने लगे। समर्थकों की आंखें नम थीं और हर कोई अपने लोकप्रिय नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहा था। प्रशासन ने भी भीड़ को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं कीं।

पूर्वांचल की राजनीति में छोड़ गए गहरी छाप

लगातार तीन बार विधायक बनने वाले उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में संगठन और जनता दोनों के बीच मजबूत विश्वास कायम किया। उनकी पहचान एक जमीनी नेता के रूप में रही, जिन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत कर विधानसभा तक का सफर तय किया। उनके निधन से बसपा ही नहीं बल्कि पूर्वांचल की राजनीति ने भी एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि को खो दिया है।

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