नई दिल्ली। देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश खाद्य पदार्थों में मिलावट और मानकों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में सबसे आगे है। राज्य में 2024-25 के दौरान 30 हजार से अधिक खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें करीब 15 हजार नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों, मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल के दिनों में भी यूपी में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई जगह कार्रवाई की है।
इस साल जनवरी में कासगंज में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 7,210 किलो मिलावटी घी जब्त किया गया था। बरामद सामान की कीमत करीब 14.5 लाख रुपये बताई गई थी और मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
वहीं, हाल ही में आगरा के फतेहपुर सीकरी में एक इकाई पर छापेमारी के दौरान 13.5 क्विंटल मिलावटी आटा पकड़ा गया। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें नरम पत्थर की धूल मिलाने का आरोप सामने आया है।
उत्तर प्रदेश में खाद्य मिलावट के खिलाफ हालिया अभियान के दौरान अधिकारियों ने करीब 11.66 करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद जब्त किए। कार्रवाई के दौरान 2,965 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए और छह FIR दर्ज की गईं। करीब 63.17 लाख रुपये मूल्य के असुरक्षित खाद्य पदार्थ नष्ट किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
यूपी में पनीर और दूध की मिलावट को लेकर भी लगातार कार्रवाई हो रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने अलग-अलग अभियानों में मिलावटी पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों को नष्ट किया है। FSSAI ने भी यूपी समेत कई राज्यों में खाद्य इकाइयों के निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में नमूनों का फेल होना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि, किसी राज्य में अधिक मामले सामने आना केवल मिलावट अधिक होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि जांच की संख्या, प्रवर्तन अभियान और नमूने लेने की प्रक्रिया भी आंकड़ों को प्रभावित करती है। फिर भी यूपी में सामने आए आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत जरूर दिखाते हैं।