चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने करवट ली है। पहाड़ों पर लगातार बर्फबारी हो रही है, जिसके चलते प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब बर्फ की चादर से ढक गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के साथ तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने राज्य के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए 26 और 27 सितंबर को चारधाम यात्रा और आदि कैलाश यात्रा स्थगित कर दी गई है।
मौसम विभाग की ओर से उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। चारधाम यात्रा और आदि कैलाश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहाड़ी मार्गों से होकर पहुंचते हैं। ऐसे में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क बाधित होने और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए यात्रा को दो दिनों के लिए रोकने का फैसला किया गया है। श्रद्धालुओं से मौसम सामान्य होने तक यात्रा पर आगे नहीं बढ़ने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
चमोली के ऊंचाई वाले इलाकों में जारी बर्फबारी ने मौसम के बदलते मिजाज को और स्पष्ट कर दिया है। हेमकुंड साहिब समुद्र तल से करीब 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सितंबर के अंतिम दिनों में हुई बर्फबारी के बाद आसपास का पूरा क्षेत्र सफेद नजर आने लगा है। पहाड़ों की चोटियों और आसपास के इलाकों में बर्फ जमने से तापमान में और गिरावट की संभावना बनी हुई है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलने के लिए जाना जाता है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने, भूस्खलन होने और यातायात प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। कई स्थानों पर छोटे-बड़े नाले और नदियां भी उफान पर आ सकती हैं। इसी वजह से मौसम विभाग की चेतावनी के बाद संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
चारधाम यात्रा के तहत बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है। यात्रा मार्गों पर मौसम की स्थिति और सड़क की परिस्थितियों पर निगरानी रखी जा रही है। खराब मौसम की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी जाती है। यात्रा स्थगित किए जाने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को संभावित जोखिम से बचाना है।इसी तरह आदि कैलाश यात्रा मार्ग भी ऊंचाई वाले और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
भारी बारिश और बर्फबारी की स्थिति में इस क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल हो सकती है। ऐसे में 26 और 27 सितंबर को यात्रा रोकने का निर्णय सुरक्षा के लिहाज से लिया गया है। मौसम में सुधार और प्रशासन की अनुमति के बाद ही आगे की यात्रा को लेकर निर्णय लिया जाएगा।मौसम विभाग के अलर्ट के बीच स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने को कहा गया है। विशेष रूप से नदी, नाले और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पर्यटकों और यात्रियों को भी मौसम की ताजा जानकारी हासिल करने के बाद ही यात्रा की योजना बनाने को कहा जा रहा है।
उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का असर केवल यात्रा गतिविधियों तक सीमित नहीं है। खराब मौसम की स्थिति में सड़क, बिजली और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें बंद होने की स्थिति में यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग या सुरक्षित स्थानों पर रोका जा सकता है। आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सतर्क रखा गया है।
फिलहाल चमोली में हेमकुंड साहिब का बर्फ से ढकना जहां पहाड़ों में बढ़ती ठंड का संकेत दे रहा है, वहीं भारी बारिश के रेड अलर्ट ने राज्य में सावधानी बढ़ा दी है। 26 और 27 सितंबर को चारधाम और आदि कैलाश यात्रा स्थगित किए जाने के बाद यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के ताजा निर्देशों के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।