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रूसी डीजल खरीदना है, भारत जैसे हमें भी छूट दो’, जंग के बीच संकट में फंसे बांग्लादेश ने ट्रंप से लगाई गुहार

बांग्लादेश ने बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका से रूसी डीजल की खरीद के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट की मांग की है. बांग्लादेश ने इस छूट की मांग करते हुए भारत का हवाला दिया है और अमेरिका से कहा है कि जिस तरह से भारत को छूट दी गई है, बांग्लादेश को भी वैसी ही छूट मिले.

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inkhbar News
  • March 31, 2026 8:43 am IST, Updated 2 weeks ago

बांग्लादेश ने बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका से रूसी डीजल की खरीद के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट की मांग की है. बांग्लादेश ने इस छूट की मांग करते हुए भारत का हवाला दिया है और अमेरिका से कहा है कि जिस तरह से भारत को छूट दी गई है, बांग्लादेश को भी वैसी ही छूट मिले.

ईरान जंग के बीच तेल-गैस की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी की थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बांग्लादेश ने इसी छूट का हवाला देते हुए अमेरिका से कहा है कि उसे दो महीने की मांग पूरी करने लायक डीजल चाहिए और वो इसे रूस के खरीदना चाहता है.

बांग्लादेश ने भारत को दी गई छूट जैसी ही व्यवस्था की मांग की है और प्रस्ताव रखा है कि वो अधिकतम 6 लाख मीट्रिक टन रूस ी डीजल आयात कर सकता है. ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव मोनिर हुसैन चौधरी ने कहा, ‘(अमेरिका के समक्ष) पत्र जमा कर दिया गया है और अब हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं.

ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है बांग्लादेश
करीब 17.5 करोड़ आबादी वाला बांग्लादेश अपनी लगभग 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. इस कमी को पूरा करने के लिए सरकारी एजेंसियां लगातार अस्थिर वैश्विक बाजार का सहारा ले रही हैं. सरकार ने ईंधन की राशनिंग भी लागू की है, हालांकि ईद-उल-फितर के मौके पर कुछ पाबंदियों में ढील दी गई थी.

चौधरी ने कहा, ‘हम अमेरिका, रूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, अंगोला और ऑस्ट्रेलिया समेत हर संभव जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं.’

बांग्लादेश अपने मौजूदा साझेदारों से आयात भी बढ़ा रहा है. बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन अप्रैल में भारत की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से 40,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने जा रहा है. यह बांग्लादेश की मार्च की खरीद से लगभग दोगुना है.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध ऊर्जा बाजार को और अधिक झटका देने वाला है. तेल आपूर्ति में रुकावट के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात पर निर्भर देशों पर भारी दबाव पड़ रहा है.

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