नई दिल्ली। बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से चर्चा में रहे BAT-BMS ऐप के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म से इसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, इस ऐप का कथित रूप से उपयोग बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System-BMS) में अनधिकृत हस्तक्षेप करने और कुछ ई-रिक्शा या अन्य बैटरी चालित वाहनों को दूर से नियंत्रित अथवा निष्क्रिय करने के लिए किए जाने की आशंका जताई गई थी। इसी को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कार्रवाई शुरू की है।
सूत्रों के अनुसार, BAT-BMS के अलावा Lossigy और Epoch-i-ion जैसे कुछ अन्य ऐप्स को भी जांच के दायरे में रखा गया है। संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भी मोबाइल एप्लीकेशन इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा या उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ उपयोग होती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई पोस्ट वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि कुछ मोबाइल ऐप्स की मदद से ई-रिक्शा की बैटरी को डिसेबल किया जा सकता है। इन दावों के बाद बैटरी निर्माता कंपनियों, वाहन मालिकों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सरकार ने संभावित खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम उठाने का फैसला किया है।
बताया जा रहा है कि संबंधित ऐप्स का उपयोग बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता था। BMS किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो चार्जिंग, डिस्चार्जिंग, तापमान और सुरक्षा से जुड़े कई कार्यों को नियंत्रित करता है। यदि इसमें छेड़छाड़ की जाती है तो वाहन की कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में यदि कोई तकनीक या ऐप सुरक्षा मानकों के खिलाफ काम करती है या उसका दुरुपयोग होने की संभावना है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इसी प्रकार के अन्य ऐप्स पर भी नजर रखी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में यह सामने आता है कि कोई अन्य एप्लीकेशन भी बैटरी या इलेक्ट्रिक वाहन के सिस्टम में अनधिकृत हस्तक्षेप कर रही है, तो उसे भी ब्लॉक करने या प्लेटफॉर्म से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
ई-रिक्शा चालकों में बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई ई-रिक्शा चालकों और इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के बीच चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि यदि किसी ऐप के जरिए वाहन की बैटरी को प्रभावित किया जा सकता है, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक केवल अधिकृत सर्विस सेंटर या निर्माता कंपनी की अनुमति से ही पहुंच होनी चाहिए। किसी भी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का उपयोग वाहन की वारंटी, सुरक्षा और प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
साइबर सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। आधुनिक ईवी में कई डिजिटल सिस्टम जुड़े होते हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। इसी कारण सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रही हैं, जिनसे वाहन या उपभोक्ता की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगकर्ताओं को केवल अधिकृत मोबाइल एप्लीकेशन ही डाउनलोड करनी चाहिए और किसी भी अनजान स्रोत से उपलब्ध ऐप का उपयोग करने से बचना चाहिए। साथ ही वाहन के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करना और निर्माता कंपनी के दिशा-निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
सरकार की कार्रवाई के बाद संबंधित ऐप्स की विस्तृत जांच जारी है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या सुरक्षा मानकों से समझौता करने के प्रमाण मिलते हैं, तो आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं यदि कोई अन्य प्लेटफॉर्म या एप्लीकेशन भी इसी तरह के दुरुपयोग में शामिल पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में तकनीकी जांच, साइबर सुरक्षा मूल्यांकन और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।