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FSSAI का एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर शिकंजा, भेजा नोटिस

नई दिल्ली: देश में बिकने वाले प्रमुख एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने रेड बुल, स्टिंग, मॉन्स्टर एनर्जी, कैफे एनर्जी ड्रिंक, गोल्ड बर्स्ट, हेल और एड्रेनालिन रश सहित कई कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रचार में किए […]

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  • July 3, 2026 8:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: देश में बिकने वाले प्रमुख एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने रेड बुल, स्टिंग, मॉन्स्टर एनर्जी, कैफे एनर्जी ड्रिंक, गोल्ड बर्स्ट, हेल और एड्रेनालिन रश सहित कई कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रचार में किए जा रहे दावों पर जवाब मांगा है। FSSAI का कहना है कि इन उत्पादों को “एनर्जी ड्रिंक” के रूप में प्रचारित करना और ऐसे दावे करना, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं, मौजूदा खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में भारत में “Energy Drink” नाम से किसी अलग खाद्य श्रेणी या मानक को अधिसूचित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद के नाम या लेबल पर इस शब्द का उपयोग उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा पैदा कर सकता है। FSSAI का मानना है कि खाद्य उत्पादों की श्रेणी का निर्धारण केवल नियामकीय उद्देश्य के लिए होता है, न कि उत्पाद की ब्रांडिंग या मार्केटिंग के लिए।

क्या है पूरा मामला?

FSSAI के अनुसार कई कंपनियां अपने उत्पादों के विज्ञापनों और लेबल पर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिनसे यह संदेश जाता है कि इन पेयों का सेवन करने से शरीर में तुरंत ऊर्जा आएगी, मानसिक क्षमता बढ़ेगी, फोकस बेहतर होगा या सामान्य कमजोरी दूर होगी। प्राधिकरण का कहना है कि ऐसे दावे Food Safety and Standards Act, 2006 तथा उससे जुड़े नियमों के तहत अनुमन्य नहीं हैं।

नोटिस में कंपनियों से पूछा गया है कि वे किस कानूनी आधार पर अपने उत्पादों को “एनर्जी ड्रिंक” के रूप में प्रचारित कर रही हैं और ऐसे दावों के समर्थन में उनके पास क्या वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं।

FSSAI ने क्या कहा?

FSSAI ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि:

भारत में “Energy Drink” नाम से कोई अधिसूचित खाद्य मानक नहीं है।

खाद्य श्रेणी (Food Category System) का उपयोग केवल नियामकीय वर्गीकरण के लिए किया जाता है, ब्रांडिंग या लेबलिंग के लिए नहीं।

किसी भी खाद्य उत्पाद पर ऐसे दावे नहीं किए जा सकते जो उसे चिकित्सीय या विशेष स्वास्थ्य लाभ देने वाला साबित करें।

“Boost Energy”, “Enhance Focus”, “Revitalizes Body and Mind” या इसी तरह के प्रचारात्मक दावों की वैधता नियमानुसार जांच के दायरे में आती है।

उपभोक्ताओं के हित में कार्रवाई

विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर लिखी गई जानकारी उपभोक्ताओं के खरीद निर्णय को प्रभावित करती है। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाएं जिनका वैज्ञानिक आधार स्पष्ट न हो, तो उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। इसी कारण FSSAI ने कंपनियों से जवाब मांगते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की है।

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी पेय या खाद्य उत्पाद का चयन करते समय केवल प्रचार पर नहीं, बल्कि उसकी पोषण संबंधी जानकारी, सामग्री (Ingredients) और चेतावनी संबंधी निर्देशों को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए।

कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी कंपनी ने खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसे अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन में बदलाव करना पड़ सकता है। आवश्यक होने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि फिलहाल FSSAI ने कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा है और उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

एनर्जी ड्रिंक बाजार पर पड़ेगा प्रभाव

भारत में एनर्जी ड्रिंक का बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। युवाओं, खिलाड़ियों और कॉर्पोरेट पेशेवरों के बीच इन पेयों की मांग अधिक देखी जाती है। ऐसे में FSSAI की यह कार्रवाई पूरे उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भविष्य में उत्पादों की पैकेजिंग, मार्केटिंग और विज्ञापन रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियामकीय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाता है तो उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

अब सभी संबंधित कंपनियों को FSSAI के नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद प्राधिकरण दस्तावेजों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और नियमों के आधार पर यह तय करेगा कि संबंधित कंपनियों ने खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

FSSAI की इस पहल को उपभोक्ता हितों की रक्षा और खाद्य उत्पादों की पारदर्शी लेबलिंग सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे खाद्य एवं पेय उद्योग में जिम्मेदार विज्ञापन और नियामकीय अनुपालन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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