नई दिल्ली। अगर आप अक्सर अपने Google अकाउंट का पासवर्ड भूल जाते हैं और अकाउंट रिकवर करने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तो आने वाले समय में यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। Google एक ऐसे नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है, जिसमें यूजर अपनी पहचान साबित करने के लिए एक छोटा-सा सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करेगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से इस वीडियो का सत्यापन किया जाएगा और यदि पहचान सही पाई गई तो अकाउंट रिकवरी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित हो सकती है।
मौजूदा समय में Google अकाउंट रिकवर करने के लिए पासवर्ड, रिकवरी ईमेल, मोबाइल नंबर, वन टाइम पासवर्ड (OTP) और अन्य सुरक्षा विकल्पों का उपयोग करता है। हालांकि कई बार यूजर के पास इन विकल्पों तक पहुंच नहीं होती, जिससे अकाउंट रिकवर करना मुश्किल हो जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए कंपनी एक अतिरिक्त सुरक्षा प्रणाली पर काम कर रही है।
जानकारी के अनुसार, नए फीचर के तहत अकाउंट रिकवरी के दौरान यूजर से एक छोटा-सा सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहा जाएगा। इसके बाद AI आधारित सिस्टम वीडियो का विश्लेषण करेगा और यह जांचेगा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तविक है या नहीं। यदि सिस्टम को पहचान सत्यापित हो जाती है, तो रिकवरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर फर्जी रिकवरी प्रयासों और साइबर अपराधों पर रोक लगाने में मददगार साबित हो सकता है। वर्तमान समय में साइबर ठग फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और अन्य तरीकों से लोगों के अकाउंट तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में केवल पासवर्ड या OTP पर निर्भर रहना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। AI आधारित वीडियो सत्यापन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करेगा।
यह भी बताया जा रहा है कि सेल्फी वीडियो सत्यापन का उद्देश्य केवल अकाउंट रिकवरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना है। इसका मतलब यह नहीं है कि Google पासवर्ड या OTP सिस्टम को पूरी तरह समाप्त कर देगा। कंपनी इस फीचर को मौजूदा सुरक्षा विकल्पों के साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के रूप में इस्तेमाल करेगी।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, वीडियो सत्यापन में लाइवनेस डिटेक्शन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। यह तकनीक यह पहचानने में सक्षम होती है कि कैमरे के सामने वास्तविक व्यक्ति मौजूद है या किसी फोटो, वीडियो या डिजिटल माध्यम से सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की जा रही है। इससे फर्जी पहचान के जरिए अकाउंट हासिल करने की संभावना काफी कम हो सकती है।
डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में AI का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। बैंकिंग, फिनटेक, ऑनलाइन भुगतान और सरकारी सेवाओं में भी फेस वेरिफिकेशन और बायोमेट्रिक पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में Google का यह कदम भी डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, गोपनीयता को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। कई यूजर यह जानना चाहेंगे कि उनका रिकॉर्ड किया गया वीडियो कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि Google इस संबंध में स्पष्ट प्राइवेसी गाइडलाइन जारी करेगा और बताएगा कि वीडियो केवल पहचान सत्यापन के लिए इस्तेमाल होगा।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नए सुरक्षा फीचर का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना होना चाहिए। यदि यह फीचर सही तरीके से लागू किया जाता है, तो लाखों ऐसे लोगों को राहत मिल सकती है जो पासवर्ड भूल जाने या रिकवरी विकल्प उपलब्ध न होने के कारण अपने अकाउंट तक पहुंच नहीं बना पाते।
फिलहाल यह फीचर परीक्षण चरण में बताया जा रहा है और इसे सीमित यूजर्स के बीच परखा जा सकता है। सफल परीक्षण के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से अधिक यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। कंपनी की ओर से इसकी आधिकारिक लॉन्च तारीख या वैश्विक रोलआउट को लेकर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी नए फीचर के आने का इंतजार करने के बजाय यूजर्स को अभी से अपने Google अकाउंट की सुरक्षा मजबूत रखनी चाहिए। इसके लिए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें, टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2FA) चालू रखें, रिकवरी ईमेल और मोबाइल नंबर अपडेट रखें तथा संदिग्ध लिंक या ईमेल से सावधान रहें।
यदि भविष्य में सेल्फी वीडियो आधारित रिकवरी फीचर व्यापक स्तर पर उपलब्ध होता है, तो यह न केवल अकाउंट रिकवरी को आसान बनाएगा बल्कि साइबर अपराधियों के लिए किसी दूसरे व्यक्ति का अकाउंट हासिल करना भी पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा। ऐसे में यह फीचर डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।