नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) अभियान के तहत अपना गणना प्रपत्र (Enumeration Form) प्रस्तुत किया और देश के सभी पात्र मतदाताओं से इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक सटीक, अद्यतन और विश्वसनीय मतदाता सूची भारत के लोकतंत्र की मजबूती का आधार है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि मतदाता सूची सही, पारदर्शी और अद्यतन हो। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान में सहयोग करें और समय पर अपनी जानकारी का सत्यापन तथा आवश्यक अद्यतन कराएं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता काफी हद तक मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है। यदि मतदाता सूची में सभी पात्र नागरिकों के नाम सही रूप से दर्ज हों और त्रुटियों को समय पर सुधारा जाए, तो चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनती है।
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना, स्थानांतरण या अन्य कारणों से आवश्यक संशोधन करना तथा त्रुटियों को दूर करना है। निर्वाचन आयोग समय-समय पर इस प्रकार के अभियान चलाता है ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार प्रभावी ढंग से मिल सके।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों की भागीदारी किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने युवाओं, पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों और अन्य पात्र मतदाताओं से विशेष रूप से अपील की कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में चल रहे पुनरीक्षण अभियान में भाग लें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपनी जानकारी का सत्यापन कराएं। मतदाता सूची न केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करती है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति नागरिकों के विश्वास को भी मजबूत करती है। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।