भारत-इजरायल आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती

नई दिल्ली: भारत और इजरायल के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला द्विपक्षीय निवेश समझौता (Bilateral Investment Treaty-BIT) शनिवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस समझौते को दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने, निवेशकों का विश्वास मजबूत करने और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम […]

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  • July 4, 2026 5:55 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: भारत और इजरायल के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला द्विपक्षीय निवेश समझौता (Bilateral Investment Treaty-BIT) शनिवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस समझौते को दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने, निवेशकों का विश्वास मजबूत करने और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह निवेश संधि दोनों देशों के बीच सुरक्षित, पारदर्शी और नियम-आधारित निवेश वातावरण तैयार करने का लक्ष्य रखती है। इसके तहत निवेशकों को बेहतर कानूनी संरक्षण मिलेगा, वहीं सरकारों को सार्वजनिक हित, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास संबंधी नीतिगत फैसले लेने के लिए आवश्यक अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। इस प्रकार समझौता निवेश संरक्षण और सरकारी नियामकीय अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

सरकार के अनुसार, यह समझौता अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के आधुनिक मानकों और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके लागू होने से दोनों देशों के बीच सीमा-पार निवेश, औद्योगिक सहयोग और कारोबारी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

समझौते में निवेश के संरक्षण, संपत्तियों के अधिग्रहण की स्थिति में सुरक्षा, निवेश से जुड़े धन के सुगम हस्तांतरण, पारदर्शिता और निवेश विवादों के समाधान के लिए स्वतंत्र मध्यस्थता जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य निवेशकों को अधिक भरोसा देना और नए निवेश को प्रोत्साहित करना है।

भारत और इजरायल के बीच पहले से ही रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग रहा है। अब निवेश संधि के लागू होने से वित्तीय सेवाओं, स्टार्टअप, फिनटेक, डिजिटल भुगतान, आधारभूत ढांचे और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश का आकार लगभग 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई निवेश संधि लागू होने के बाद यह आंकड़ा आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है। इससे दोनों देशों की कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच, पूंजी निवेश और तकनीकी सहयोग के अधिक अवसर मिलेंगे।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में ऐसे निवेश समझौते निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को स्थिर आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत और इजरायल के बीच यह समझौता भी दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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