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अब AI नहीं चुरा सकेगा आपका चेहरा! केट ब्लैंचेट का नया टूल

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ी से बढ़ती दुनिया में जहां तकनीक लोगों की ज़िंदगी को आसान बना रही है, वहीं इसके दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, बिना अनुमति फोटो का इस्तेमाल और AI मॉडल की ट्रेनिंग में व्यक्तिगत डेटा के उपयोग जैसे मामलों ने […]

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  • July 11, 2026 1:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ी से बढ़ती दुनिया में जहां तकनीक लोगों की ज़िंदगी को आसान बना रही है, वहीं इसके दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, बिना अनुमति फोटो का इस्तेमाल और AI मॉडल की ट्रेनिंग में व्यक्तिगत डेटा के उपयोग जैसे मामलों ने दुनियाभर में निजता (Privacy) और डिजिटल अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। इसी बीच ऑस्कर विजेता हॉलीवुड अभिनेत्री केट ब्लैंचेट ने एक नई पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपनी डिजिटल पहचान पर अधिक नियंत्रण देना है।

इस पहल के तहत Human Consent Registry नाम का एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए कोई भी व्यक्ति कुछ ही मिनटों में यह दर्ज कर सकता है कि उसकी फोटो, आवाज, नाम या अन्य डिजिटल पहचान का AI कंपनियां उपयोग कर सकती हैं या नहीं। इस पहल को AI सुरक्षा और डिजिटल सहमति (Digital Consent) की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

क्या है Human Consent Registry?

Human Consent Registry एक ऐसा डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म है, जहां उपयोगकर्ता अपनी स्पष्ट सहमति दर्ज कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी तस्वीर, आवाज या व्यक्तिगत डेटा का AI मॉडल की ट्रेनिंग, डीपफेक निर्माण या अन्य डिजिटल उपयोग के लिए इस्तेमाल नहीं चाहता, तो वह इस प्लेटफॉर्म पर अपनी इच्छा दर्ज कर सकता है।

इसका मुख्य उद्देश्य AI कंपनियों और डेवलपर्स के सामने यह स्पष्ट करना है कि किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान का उपयोग उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि यह पहल कानूनी रूप से हर देश में बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे डिजिटल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

क्यों पड़ी इस पहल की जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में AI तकनीक के विकास के साथ डीपफेक वीडियो और वॉयस क्लोनिंग के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोगों की तस्वीरों और आवाज का इस्तेमाल उनकी जानकारी या अनुमति के बिना किया गया। सोशल मीडिया पर नकली वीडियो वायरल होने से कई लोगों की प्रतिष्ठा और निजी जीवन प्रभावित हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI कंपनियों को डेटा के उपयोग से पहले स्पष्ट सहमति लेना आवश्यक होना चाहिए। Human Consent Registry इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश है, ताकि उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

केवल कलाकारों के लिए नहीं, आम लोगों के लिए भी

हालांकि इस पहल को हॉलीवुड कलाकारों का समर्थन मिला है, लेकिन इसे केवल फिल्म उद्योग तक सीमित नहीं रखा गया है। आम नागरिक भी इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं और अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए अपनी प्राथमिकताएं दर्ज कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में यदि AI आधारित सेवाएं और अधिक व्यापक होंगी, तो इस तरह के डिजिटल सहमति प्लेटफॉर्म की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

कई चर्चित हस्तियों का समर्थन

Human Consent Registry को तकनीकी विशेषज्ञों, डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं और कई हॉलीवुड कलाकारों का समर्थन मिला है। अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना है कि AI का विकास मानव अधिकारों और निजता का सम्मान करते हुए होना चाहिए।

समर्थकों का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल समाज के हित में होना चाहिए, लेकिन इसके लिए पारदर्शिता और उपयोगकर्ता की सहमति सबसे महत्वपूर्ण है।

भारत जैसे देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता देशों में शामिल है। यहां करोड़ों लोग सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। ऐसे में AI आधारित फर्जी वीडियो, साइबर धोखाधड़ी और पहचान की चोरी जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी डिजिटल पहचान की सुरक्षा और AI कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमों और सहमति आधारित व्यवस्था की आवश्यकता है। यदि ऐसी पहलें व्यापक स्तर पर लागू होती हैं, तो लोगों को अपनी निजी जानकारी और डेटा पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है।

AI कंपनियों के सामने नई चुनौती

AI उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ डेटा संग्रह और उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई AI मॉडल इंटरनेट पर उपलब्ध तस्वीरों, लेखों और अन्य सामग्री से सीखते हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि क्या किसी व्यक्ति की तस्वीर या आवाज का उपयोग उसकी अनुमति के बिना किया जाना उचित है।

Human Consent Registry इसी बहस के बीच एक वैकल्पिक समाधान पेश करता है, जहां व्यक्ति स्वयं यह तय कर सकता है कि उसकी डिजिटल पहचान का उपयोग किस सीमा तक किया जा सकता है।

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI तकनीक और अधिक उन्नत होगी। ऐसे में डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और निजता की रक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर मजबूत नीतियों की जरूरत पड़ेगी। Human Consent Registry जैसी पहलें इस दिशा में शुरुआती प्रयास मानी जा रही हैं।

हालांकि यह देखना बाकी है कि AI कंपनियां और विभिन्न देशों की सरकारें इस तरह की सहमति आधारित व्यवस्थाओं को किस हद तक अपनाती हैं, लेकिन इतना तय है कि AI के युग में व्यक्तिगत डेटा और डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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