नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) के उन अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं जो पाठ्यपुस्तकों के लिए कागज आपूर्ति करने वाली एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी के फैसले का दिल्ली हाईकोर्ट में प्रभावी ढंग से बचाव करने में नाकाम रहे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला लापरवाही और प्रशासनिक चूक से जुड़ा है।
कंपनी को किया गया था ब्लैकलिस्ट: एनसीईआरटी ने 22 जून को एक आदेश जारी कर “बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड” को दो साल के लिए अपनी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित (काली सूची में) कर दिया था।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला: कंपनी ने इस काली सूची आदेश का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई में नहीं पहुंचा एनसीईआरटी प्रतिनिधि: सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी का कोई भी प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते कोर्ट ने कंपनी को अगले आदेश तक दंडात्मक कार्रवाई से राहत दे दी। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने एनसीईआरटी को उक्त आपूर्तिकर्ता की छह करोड़ रुपये से अधिक की बैंक गारंटी भुनाने से भी रोक दिया है।
एक सूत्र के अनुसार, “एनसीईआरटी द्वारा हाईकोर्ट में अपने फैसले का बचाव न कर पाने की खबरों को शिक्षा मंत्री ने बेहद गंभीरता से लिया है और इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जरूरी कानूनी कदम उठाने में नाकाम रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया गया है।'”
यह पूरा कानूनी मामला अब आगामी 20 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।