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डीजल नहीं, कोयला नहीं! आखिर कैसे दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन? जानिए पूरा विज्ञान

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द ही यात्रियों के लिए शुरू होने वाली है। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या कोयले से नहीं बल्कि हाइड्रोजन गैस की मदद से संचालित होगी। रेलवे का दावा है कि यह तकनीक […]

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  • July 17, 2026 11:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द ही यात्रियों के लिए शुरू होने वाली है। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या कोयले से नहीं बल्कि हाइड्रोजन गैस की मदद से संचालित होगी। रेलवे का दावा है कि यह तकनीक न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर होगी बल्कि भविष्य में रेल परिवहन को अधिक स्वच्छ, किफायती और टिकाऊ बनाएगी।

भारत सरकार और भारतीय रेलवे लंबे समय से कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी अभियान के तहत पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारतीय रेलवे की तस्वीर बदल सकती है।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन ऐसी रेलगाड़ी होती है जिसमें डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में हाइड्रोजन गैस और हवा में मौजूद ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जो ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है।

सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रदूषण के रूप में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। यही कारण है कि इसे पर्यावरण के अनुकूल तकनीक माना जाता है।

कैसे काम करती है हाइड्रोजन फ्यूल सेल?

ट्रेन में विशेष टैंक लगाए जाते हैं जिनमें उच्च दबाव पर हाइड्रोजन गैस संग्रहित रहती है। यह गैस फ्यूल सेल तक पहुंचती है। दूसरी ओर बाहर की हवा से ऑक्सीजन ली जाती है। दोनों के बीच होने वाली इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया से बिजली बनती है।

इस बिजली से ट्रेन के पहिए घूमते हैं। अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर भी किया जा सकता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में इंजन से धुआं या जहरीली गैसें नहीं निकलतीं।

डीजल ट्रेन से कितनी अलग होगी?

डीजल इंजन में ईंधन जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य प्रदूषक गैसें निकलती हैं। इसके विपरीत हाइड्रोजन ट्रेन में किसी प्रकार का ईंधन जलाया नहीं जाता।

इस कारण यह ट्रेन अधिक शांत, कम कंपन वाली और पर्यावरण के लिए सुरक्षित मानी जाती है। इसके संचालन से ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा।

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में शामिल है। ऐसे में यदि हाइड्रोजन तकनीक का सफल विस्तार होता है तो इसके कई बड़े लाभ होंगे।

कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।

डीजल पर निर्भरता कम होगी।

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।

भविष्य में परिचालन लागत कम हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

किन मार्गों पर चलेगी पहली ट्रेन?

भारतीय रेलवे ने शुरुआत में इस ट्रेन को एक चयनित रूट पर चलाने की तैयारी की है। परीक्षण और सुरक्षा मानकों के सफल होने के बाद इसे अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी विस्तार दिया जा सकता है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में तकनीक की विश्वसनीयता और प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विदेशों में पहले से चल रही हैं हाइड्रोजन ट्रेनें

जर्मनी, फ्रांस, चीन और कुछ अन्य देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। इन ट्रेनों ने साबित किया है कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन भविष्य का बेहतर विकल्प बन सकता है।

भारत अब इस तकनीक को अपनाने वाले देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है। इससे देश की तकनीकी क्षमता और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बनेगी।

क्या पूरी तरह सुरक्षित है यह तकनीक?

कई लोगों के मन में हाइड्रोजन गैस को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ट्रेन में लगाए गए टैंक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किए जाते हैं। इनमें अत्याधुनिक सेंसर, गैस लीक डिटेक्शन सिस्टम और स्वचालित सुरक्षा उपकरण लगाए जाते हैं।

नियमित निरीक्षण और रखरखाव के कारण जोखिम की संभावना बेहद कम रहती है।

रेलवे का हरित भविष्य

भारतीय रेलवे पहले ही बड़े पैमाने पर रेल मार्गों का विद्युतीकरण कर चुका है। अब हाइड्रोजन तकनीक के जरिए उन क्षेत्रों में भी स्वच्छ परिवहन उपलब्ध कराया जा सकेगा जहां पूरी तरह विद्युतीकरण संभव नहीं है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में बैटरी और हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें रेलवे नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। इससे देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं बल्कि भविष्य की हरित तकनीक की ओर बढ़ाया गया बड़ा कदम है। बिना डीजल और कोयले के चलने वाली यह ट्रेन पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया उदाहरण पेश करेगी। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे का बड़ा हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा आधारित तकनीकों पर संचालित होता दिखाई दे सकता है।

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