नई दिल्ली। देश के बहुचर्चित NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत में ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर के संचालक ने कथित तौर पर परीक्षा से पहले NEET के रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए पांच लाख रुपये का भुगतान किया था। यह जानकारी CBI ने अदालत में आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दी।
CBI के इस दावे के बाद एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि परीक्षा से पहले गोपनीय प्रश्नों तक पहुंच बनाने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई थी।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसी के मुताबिक लातूर स्थित कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज रत्नाथ मोटेगांवकर ने कथित रूप से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के उस पैनल से जुड़े व्यक्ति पीवी कलकर्णी के माध्यम से प्रश्न प्राप्त करने का प्रयास किया। पीवी कलकर्णी परीक्षा के लिए प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों के पैनल से जुड़े थे। आरोप है कि इसी माध्यम से परीक्षा से पहले रसायन विज्ञान के प्रश्न हासिल किए गए।
CBI ने अदालत को बताया कि आरोपी द्वारा पांच लाख रुपये का भुगतान किया गया था। एजेंसी का दावा है कि इस भुगतान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक तथा दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच जारी है।
जमानत याचिका का CBI ने किया विरोध
बुधवार को अदालत में सुनवाई के दौरान CBI ने आरोपी की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। एजेंसी का कहना था कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और जांच अभी जारी है। यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या अन्य गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
CBI ने अदालत से कहा कि मामले में कई डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। ऐसे में आरोपी को राहत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।
NEET पेपर लीक मामले की जांच जारी
देशभर में करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच CBI कर रही है। जांच एजेंसी विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों, संदिग्ध लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रश्नपत्र लीक की कथित साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही, किस स्तर तक नेटवर्क फैला था और किस प्रकार परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित हुई।
परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
CBI के इस खुलासे के बाद एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी होगी।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित होने तक की पूरी प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
छात्रों और अभिभावकों में चिंता
देशभर के लाखों छात्र हर वर्ष NEET परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक से जुड़ी खबरों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई छात्रों का कहना है कि वे वर्षों की मेहनत करते हैं और यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो उनका मनोबल प्रभावित होता है।
अभिभावकों ने भी मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।
फिलहाल अदालत में मामले की सुनवाई जारी है और CBI अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। एजेंसी विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
मामले में अदालत का अंतिम फैसला और CBI की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष जो तथ्य रखे हैं, उन्होंने NEET पेपर लीक मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।