नोएडा/बुलंदशहर: दिल्ली-NCR के विकास की तस्वीर बदलने वाली महत्वाकांक्षी न्यू नोएडा परियोजना अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। करीब 209.11 वर्ग किलोमीटर में प्रस्तावित इस नए शहर को विकसित करने की प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण सबसे अहम चरण बन गया है। नोएडा प्राधिकरण की योजना के मुताबिक परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और शुरुआती चरण में किसानों से सहमति लेकर जमीन लेने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
20-20 गांवों की जिम्मेदारी संभालेंगे दोनों OSD
न्यू नोएडा परियोजना से जुड़े काम को गति देने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक दोनों OSD को अलग-अलग गांवों की जिम्मेदारी देकर किसानों से संवाद और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य जमीन मालिकों से सीधे बातचीत करना, उनकी सहमति लेना और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों को समय पर निपटाना है।
भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील विषय में किसानों की सहमति और जमीन के मालिकाना हक की पुष्टि महत्वपूर्ण है। इसी वजह से प्रशासनिक स्तर पर सर्वे, रिकॉर्ड जांच और किसानों से संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।
209 वर्ग किलोमीटर में बनेगा नया शहर
न्यू नोएडा को दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन यानी DNGIR के तहत विकसित किया जा रहा है। योजना का कुल क्षेत्र लगभग 209.11 वर्ग किलोमीटर यानी करीब 20,911 हेक्टेयर है। इसे आधुनिक औद्योगिक और आवासीय सुविधाओं के साथ विकसित करने का खाका तैयार किया गया है।
इस परियोजना में गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर क्षेत्र के गांव शामिल हैं। विभिन्न चरणों में जमीन अधिग्रहण और विकास का काम आगे बढ़ाया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विस्तार की उम्मीद है।
पहले चरण में 37 गांवों पर फोकस
हालिया जानकारी के मुताबिक पहले चरण में 37 गांवों में करीब 3,165 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। इनमें बुलंदशहर के 24 और गौतमबुद्ध नगर के 13 गांव बताए गए हैं। अधिकारियों द्वारा फील्ड सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
किसानों से जमीन लेने की प्रक्रिया में उनकी सहमति, जमीन के दस्तावेज, मालिकाना हक और पैतृक संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इससे भविष्य में विवाद की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
किसानों के लिए मुआवजा भी अहम मुद्दा
न्यू नोएडा परियोजना में जमीन देने वाले किसानों के लिए मुआवजा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण में 4,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर का उल्लेख किया गया है। यह दर जेवर एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ी भूमि दरों के अनुरूप बताई गई है।
इसके अलावा कुछ रिपोर्टों में वैकल्पिक पैकेज की भी चर्चा की गई है, जिसमें अलग दर के साथ विकसित आवासीय भूखंड देने का विकल्प शामिल हो सकता है। हालांकि जमीन मालिकों के लिए अंतिम प्रभाव उनके मामले, दस्तावेज और लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।
चार चरणों में पूरा होगा न्यू नोएडा
न्यू नोएडा को एक साथ विकसित करने के बजाय चार चरणों में तैयार करने की योजना है। उपलब्ध मास्टर प्लान के अनुसार पहले चरण में 3,165 हेक्टेयर, दूसरे चरण में 3,798 हेक्टेयर, तीसरे चरण में 5,908 हेक्टेयर और चौथे चरण में 8,230 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अंतिम चरण को 2041 तक पूरा करने की योजना है।
इस चरणबद्ध मॉडल का मकसद विकास कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। सड़क, बिजली, पानी, सीवेज, ड्रेनेज और अन्य शहरी सुविधाओं का नेटवर्क भी इसी क्रम में विकसित किया जाएगा।
औद्योगिक विकास पर रहेगा खास जोर
न्यू नोएडा को सिर्फ आवासीय शहर के रूप में विकसित करने की योजना नहीं है। DNGIR मास्टर प्लान में औद्योगिक गतिविधियों के लिए बड़े हिस्से का प्रावधान किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 40 प्रतिशत भू-उपयोग औद्योगिक, लगभग 13 प्रतिशत आवासीय और करीब 18 प्रतिशत क्षेत्र हरित एवं मनोरंजन गतिविधियों के लिए रखा गया है।
औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।
किसानों से सहमति के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
न्यू नोएडा की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में किसानों से संवाद को खास महत्व दिया जा रहा है। अधिकारियों और संबंधित सलाहकारों द्वारा किसानों तथा जमीन मालिकों से बातचीत कर उनकी सहमति लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि विकास की रफ्तार और किसानों के हितों के बीच संतुलन बना रहे। जमीन के दस्तावेजों की जांच, मुआवजा, पारिवारिक हिस्सेदारी और मालिकाना हक जैसे मुद्दों का समाधान समय पर करना जरूरी होगा।
NCR की तस्वीर बदलने की उम्मीद
न्यू नोएडा परियोजना को दिल्ली-NCR में भविष्य के औद्योगिक और शहरी विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और आसपास के प्रमुख मार्गों से इसकी कनेक्टिविटी इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाती है।
अगर भूमि अधिग्रहण और आधारभूत ढांचे का विकास तय समय के अनुसार आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में यह इलाका निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है। हालांकि परियोजना का वास्तविक असर जमीन पर निर्माण कार्य शुरू होने और चरणबद्ध विकास पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है कि न्यू नोएडा की जमीन से जुड़ी प्रक्रिया को गति देने की कोशिश तेज हो गई है। किसानों से बातचीत, सर्वे और दस्तावेजों की जांच के बाद भूमि अधिग्रहण आगे बढ़ेगा। ऐसे में आने वाले समय में संबंधित गांवों के जमीन मालिकों और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के अगले फैसलों पर रहेगी।