मथुरा/वृंदावन । उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला चर्चा में है। गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल हुए युवा साधु की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना 25 सितंबर की सुबह की बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी में इसे आत्महत्या की आशंका से जोड़कर देखा गया, लेकिन कमरे में खून लगा ग्राइंडर मिलने, शरीर पर गंभीर चोटों और परिवार की ओर से उठाए गए सवालों के बाद मामला उलझ गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आश्रम के सीसीटीवी फुटेज, कमरे से मिले सामान और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है। विशेष रूप से घटना से पहले के लगभग 11 मिनट की गतिविधियां जांच के केंद्र में हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साधु के कमरे से निकलने और चौथी मंजिल से गिरने के बीच वास्तव में क्या हुआ था।
सुबह 10:25 बजे कमरे से निकले, 10:36 बजे हुई घटना
उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 25 सितंबर की सुबह रसिक दुलारी शरण लगभग 10:25 बजे अपने कमरे से बाहर निकले थे। इसके बाद उन्हें आश्रम की चौथी मंजिल की छत की ओर जाते हुए देखा गया। बताया जा रहा है कि वह कुछ समय तक छत पर मौजूद रहे और लगभग 10:36 बजे इमारत से नीचे गिर गए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह घटनाक्रम आश्रम में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुआ है। हालांकि, कैमरों में दिखाई देने वाली गतिविधियों की पूरी जानकारी और घटनास्थल की परिस्थितियों का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।
यही 11 मिनट अब जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गए हैं। पुलिस के सामने सवाल है कि साधु छत पर क्यों गए थे, वहां उनकी गतिविधियां क्या थीं और नीचे गिरने की परिस्थितियां क्या रहीं।
किसी व्यक्ति का छत पर जाना और उसके बाद नीचे गिरना अपने आप में आत्महत्या या किसी आपराधिक घटना का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इसलिए पुलिस के लिए सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के साथ घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों का मिलान करना आवश्यक होगा।
कमरे में मिला खून लगा ग्राइंडर, बढ़ी जांच की जटिलता
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा साधु के कमरे से कथित तौर पर मिले खून लगे ग्राइंडर की हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच टीम को कमरे में एक ग्राइंडर मिला, जिस पर खून के निशान थे। इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की बात कही गई है।
ग्राइंडर पर मौजूद खून किसका है और वह वहां कैसे पहुंचा, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस उपकरण का घटना से कोई संबंध है या नहीं।
कमरे से मिले ग्राइंडर को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या साधु को छत पर जाने से पहले कोई चोट लगी थी? यदि ऐसा हुआ था तो उसकी परिस्थितियां क्या थीं? क्या कमरे में मिले साक्ष्यों और शरीर पर मौजूद चोटों के बीच कोई संबंध है?
इन सवालों का जवाब फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल ग्राइंडर मिलने के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता या मौत के कारण के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक रक्तस्राव की बात
इस मामले में पोस्टमार्टम से संबंधित जानकारी भी सामने आई है। 27 सितंबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया कि मौत का कारण हेमरेजिक शॉक, अर्थात अत्यधिक रक्तस्राव, पाया गया है। शरीर के निजी अंग पर गंभीर चोट होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उस चोट की परिस्थितियों और कमरे से मिले उपकरण से उसके संभावित संबंध की जांच जारी है।
यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साधु के शरीर पर मौजूद सभी चोटों की प्रकृति और उनका क्रम समझना पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने में सहायक हो सकता है।
जांच में यह निर्धारित करना आवश्यक है कि कौन-सी चोट कब लगी और किन परिस्थितियों में लगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक निष्कर्ष और घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्य इस मामले की वास्तविक परिस्थितियां समझने में महत्वपूर्ण होंगे।
कौन थे रसिक दुलारी शरण?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक का वास्तविक नाम दीपक लोधी था। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे और उनकी उम्र लगभग 25 वर्ष थी।
दीपक करीब दो वर्ष पहले वृंदावन आए थे। सितंबर 2025 में उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ग्रहण की थी। दीक्षा के बाद उनका नाम रसिक दुलारी शरण रखा गया।
वह वृंदावन में रहकर भजन और साधना करते थे। बताया गया है कि उन्हें बिजली से संबंधित कार्यों की जानकारी थी और वह आश्रम में विद्युत संबंधी कार्य भी करते थे।
दीक्षा लेने के बाद उनका अधिकांश समय वृंदावन में बीतने लगा था। वह गुरु कृपा कुंज में अन्य साधकों के साथ रहते थे। यह भवन प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम के निकट स्थित है।
मोबाइल पर बज रहा था भजन, पुलिस कर रही जांच
इस घटना से जुड़ी एक अन्य जानकारी साधु के मोबाइल फोन को लेकर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद पुलिस जब उनके कमरे में पहुंची तो मोबाइल फोन पर भजन बजने की बात सामने आई।
पुलिस ने मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फोन से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जांचकर्ताओं को घटना से पहले की गतिविधियों को समझने में मदद कर सकते हैं।
मोबाइल में उपलब्ध कॉल रिकॉर्ड, संदेश और अन्य डिजिटल जानकारी के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि घटना से पहले साधु किन लोगों के संपर्क में थे।
हालांकि, फोन पर भजन बजने या मोबाइल में किसी विशेष सामग्री की मौजूदगी को मौत के कारण से जोड़ने के लिए स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे।
28 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मोबाइल फोन और सीसीटीवी की डीवीआर सहित कई साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
परिवार ने आश्रम प्रबंधन पर उठाए सवाल
रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद उनके परिवार ने आश्रम में उनसे मुलाकात को लेकर सवाल उठाए हैं।
परिवार का आरोप है कि वृंदावन आने पर उन्हें दीपक से नियमित रूप से मिलने नहीं दिया जाता था। परिजनों के अनुसार, कई बार मिलने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।
मीडिया रिपोर्ट में उनके बहनोई सोनू पटेल के हवाले से बताया गया कि परिवार को पहले दीपक के गिरने और ऑपरेशन की आवश्यकता होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद परिवार के सदस्य वृंदावन पहुंचे।
परिजनों ने मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, परिवार की ओर से सामने आए बयानों में सीधे तौर पर किसी व्यक्ति द्वारा हत्या किए जाने का निश्चित आरोप नहीं लगाया गया है।
पुलिस परिवार के इन आरोपों की भी पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि परिजनों और साधु के बीच मुलाकात की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
सीसीटीवी फुटेज से क्या सामने आया?
घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्डिंग में रसिक दुलारी शरण अपने कमरे से निकलकर सीढ़ियों की ओर जाते दिखाई देते हैं। इसके बाद वह छत पर पहुंचते हैं और कुछ देर वहां रहते हैं।
एक अन्य कैमरे में उनके चौथी मंजिल से नीचे गिरने की घटना रिकॉर्ड हुई है। फुटेज पर 25 सितंबर की सुबह 10:36 बजे का समय दर्ज बताया गया है।
जिस समय साधु सड़क पर गिरे, उस दौरान वहां से एक साइकिल सवार भी गुजर रहा था। इस घटना के बाद आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे।
पुलिस यह भी जांच रही है कि आश्रम के अलग-अलग कैमरों में दर्ज रिकॉर्डिंग से घटना के पहले और बाद की गतिविधियों का कितना स्पष्ट विवरण मिलता है।
सभी रिकॉर्डिंग का समय, घटनाक्रम और अन्य साक्ष्यों से मिलान होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
पुलिस जांच में चार प्रमुख पहलुओं पर ध्यान
मथुरा पुलिस इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है। 28 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि मृतक के साथ रहने वाले साधकों और परिवार के सदस्यों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस की एक टीम जबलपुर जाकर भी परिजनों से जानकारी जुटाएगी।
जांच में विशेष रूप से चार पहलू महत्वपूर्ण हैं।
पहला, सीसीटीवी फुटेज की जांच: आश्रम और आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करके घटना के पहले और बाद की गतिविधियों का क्रम निर्धारित करना।
दूसरा, फॉरेंसिक रिपोर्ट: कमरे से मिले ग्राइंडर, रक्त के नमूनों और अन्य भौतिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच से चोटों की परिस्थितियों को समझना।
तीसरा, मोबाइल फोन की पड़ताल: घटना से पहले हुए संपर्क और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच करना।
चौथा, पोस्टमार्टम और गवाहों के बयान: मेडिकल रिपोर्ट के निष्कर्षों का आश्रम में मौजूद लोगों और परिवार के बयानों से मिलान करना।
इन सभी पहलुओं की संयुक्त जांच से मौत की परिस्थितियों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।
निष्पक्ष जांच की मांग, अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
घटना के बाद वृंदावन के कुछ साधु-संतों ने भी मामले की गहन जांच की मांग उठाई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों ने सीबीआई जांच की मांग की है। हालांकि, ऐसी मांग और किसी जांच एजेंसी को मामला सौंपे जाने के आधिकारिक निर्णय में अंतर है।
फिलहाल पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। इस मामले में आत्महत्या की आशंका के साथ-साथ अन्य संभावित परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही है।
रसिक दुलारी शरण की मौत से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब भी यही हैं कि कमरे में उन्हें चोट कैसे लगी, वह छत पर किन परिस्थितियों में पहुंचे और उनकी मौत से पहले वास्तव में क्या हुआ।
इन सवालों के जवाब फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आ सकेंगे। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।