सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस अब इस अवैध कारोबार की जड़ें तलाशने में जुटी है। पेचकस और दूसरे औजार बनाने के कारोबार की आड़ में चल रहे इस नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह अब तक करीब 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका है। हालांकि, इस रकम की पूरी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
13 सितंबर को सामने आए इस मामले में सहारनपुर की कोतवाली नगर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), स्वाट और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई की थी। आरोपियों के कब्जे से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, छह मशीनें, सिक्के तैयार करने वाली डाई और अन्य उपकरण बरामद हुए थे। पुलिस की इस कार्रवाई ने नकली मुद्रा के कारोबार में सक्रिय अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य औजार बनाने और धातु से जुड़े काम की आड़ में नकली सिक्कों का निर्माण कर रहे थे। आरोपियों ने सिक्कों को असली जैसा दिखाने के लिए विशेष मशीनों और डाई का इंतजाम किया था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के पास रोजाना लगभग 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। आरोपियों की योजना सहारनपुर में भी बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू करने की थी। इसी बीच पुलिस को नेटवर्क की गतिविधियों की सूचना मिली और संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।
कौन हैं गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी?
पुलिस ने इस मामले में कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया। अन्य आरोपियों की पहचान हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश के रूप में हुई।
आरोपियों का संबंध पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों से बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, उपकार लूथरा लंबे समय से नकली सिक्कों के कारोबार से जुड़ा रहा है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
पुलिस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकली सिक्के और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद हुए। इनमें 1.28 लाख रुपये मूल्य के तैयार नकली सिक्के, करीब साढ़े चार लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के, छह मशीनें, पांच लोहे की डाई, 39 बिना मुहर वाली डाई, आठ मोबाइल फोन, सात हिसाब-किताब के रजिस्टर और दो कार शामिल हैं। बरामद सामान में इलेक्ट्रॉनिक कांटा, डाई पॉलिश करने की मशीन और धातु की चादरें भी शामिल थीं। पुलिस अब इन उपकरणों की खरीद और आपूर्ति से जुड़े लोगों की पहचान कर रही है।
जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, गिरोह करीब पांच रुपये की लागत से 20 रुपये का नकली सिक्का तैयार करता था। इसके बाद इन्हें अलग-अलग माध्यमों से बाजार में पहुंचाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, नकली सिक्कों को शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और अन्य नकद लेनदेन वाले स्थानों पर खपाया जाता था। बड़ी संख्या में सिक्कों का लेनदेन होने के कारण ऐसे स्थानों पर प्रत्येक सिक्के की बारीकी से जांच करना मुश्किल हो सकता है।
गिरोह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू की। सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन के माध्यम से आरोपियों के संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और नकली सिक्कों की आपूर्ति से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।18 सितंबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने मशीनों और डाई की आपूर्ति करने वालों की तलाश भी शुरू की थी। जांच का उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है, जिन्होंने इस अवैध कारोबार के लिए उपकरण उपलब्ध कराए।
इस मामले ने रोजमर्रा के नकद लेनदेन में सावधानी बरतने की आवश्यकता को सामने रखा है। दुकानदारों और ग्राहकों को संदिग्ध सिक्के मिलने पर उनकी जांच करानी चाहिए। किसी सिक्के के नकली होने का संदेह होने पर उसे आगे चलाने के बजाय बैंक या पुलिस से संपर्क करना उचित है। केवल रंग या बनावट के आधार पर किसी सिक्के को नकली घोषित नहीं करना चाहिए। सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और नकली सिक्कों की वास्तविक आपूर्ति का पता लगाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 70 करोड़ रुपये के कथित कारोबार की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि नेटवर्क का विस्तार किन-किन क्षेत्रों तक था।