• होम
  • उत्तर प्रदेश
  • सहारनपुर कार्रवाई पर संगीत सोम का विपक्ष पर धार्मिक रंग देने का आरोप

सहारनपुर कार्रवाई पर संगीत सोम का विपक्ष पर धार्मिक रंग देने का आरोप

लखनऊः सहारनपुर में एक कथित अवैध निर्माण के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। सोम का कहना […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 6, 2026 6:10 pm IST, Published 1 hour ago
लखनऊः सहारनपुर में एक कथित अवैध निर्माण के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। सोम का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाकर नहीं की गई, बल्कि कानून के तहत अवैध निर्माण और कब्जे के खिलाफ कदम उठाया गया है।

संगीत सोम ने दावा किया कि जिस इमारत को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसे मस्जिद बताकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार संबंधित निर्माण को लेकर अदालत के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कार्रवाई न्यायालय के निर्देश के आधार पर हुई है तो विपक्ष इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश क्यों कर रहा है।

सोम ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी सार्वजनिक या सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक कार्रवाई का आधार किसी व्यक्ति का धर्म नहीं, बल्कि निर्माण की वैधता और जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज होने चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

भाजपा नेता ने अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि तीनों नेताओं के बीच मुस्लिम समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की होड़ दिखाई देती है। सोम का दावा है कि इस तरह के बयानों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे मामलों में तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, न कि लोगों के बीच भ्रम पैदा करना चाहिए।

सोम ने विशेष रूप से ओवैसी की ओर से पुराने दस्तावेजों और कथित ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर किए गए दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कथित 1911 के बिजली बिल का हवाला देते हुए पूछा कि इतने पुराने दस्तावेज की प्रामाणिकता और उसके वर्तमान विवाद से संबंध की जांच किस आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी दस्तावेज को सार्वजनिक बहस का आधार बनाने से पहले उसकी आधिकारिक जांच जरूरी है।

उन्होंने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वह संविधान की किताब हाथ में लेकर न्यायालय के आदेश पर सवाल उठा रहा है। सोम के मुताबिक संविधान और न्यायपालिका दोनों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश पर होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक नारेबाजी के जरिए कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

संगीत सोम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार की नीति स्पष्ट है। उनके अनुसार सरकार किसी भी समुदाय के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, बल्कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जे या अनधिकृत निर्माण का मामला सामने आने पर कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, चाहे संबंधित व्यक्ति किसी भी समुदाय से हो।

उन्होंने विपक्ष पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माहौल खराब करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में दंगा या सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, इस पूरे विवाद में विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों और प्रशासन की कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सहारनपुर मामले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाहें प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर हैं। जहां संगीत सोम इसे अवैध कब्जे के खिलाफ कानूनसम्मत कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं विपक्षी नेता कार्रवाई की प्रकृति और उसके औचित्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में मामले के वास्तविक तथ्यों, अदालत के आदेश और संबंधित भूमि एवं निर्माण के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

सोम ने अपने बयान के अंत में विपक्ष पर मुस्लिम समाज को राजनीतिक रूप से प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि समुदाय की वास्तविक समस्याओं के बजाय विवादित मुद्दों को हवा देने से किसी का भला नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि कानून के शासन को बनाए रखना ही सरकार और राजनीतिक दलों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

Advertisement