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दिल्ली में नकली रेबीज वैक्सीन का भंडाफोड़, कानपुर तक हड़कंप

दिल्ली के भागीरथ पैलेस से दो लाख रुपये की 481 नकली रेबीज वैक्सीन बरामद। कानपुर की दो दवा फर्म सील, सप्लाई चेन की जांच तेज।

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  • September 24, 2026 9:41 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली : दिल्ली के भागीरथ पैलेस में करीब दो लाख रुपये की 481 नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन बरामद होने के बाद जांच का दायरा उत्तर प्रदेश के कानपुर तक पहुंच गया है। दवा निर्माता कंपनी ने संबंधित बैच को नकली बताया है। कानपुर में दो दवा फर्मों को सील किए जाने के बाद अब पूरी सप्लाई चेन की जांच तेज हो गई है।

तीन ठिकानों पर छापेमारी, 481 यूनिट वैक्सीन बरामद

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग ने चांदनी चौक स्थित भागीरथ पैलेस के दवा बाजार में छापेमारी कर करीब दो लाख रुपये मूल्य की 481 नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन बरामद की हैं। इस कार्रवाई के बाद दवा कारोबारियों के बीच हलचल बढ़ गई है।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह के निर्देश पर विभाग की टीम ने संबंधित फर्म के बिक्री परिसर और गोदाम सहित तीन ठिकानों की तलाशी ली। इस दौरान अभयरैब (Abhayrab) नाम से बेची जा रही रेबीज वैक्सीन की संदिग्ध खेप मिली। जांच में सामने आया कि इस खेप की आपूर्ति उत्तर प्रदेश के कानपुर से की गई थी।

निर्माता कंपनी ने बताया नकली, जांच के लिए भेजे नमूने

बरामद वैक्सीन की प्रामाणिकता की जांच के लिए औषधि नियंत्रण विभाग ने तेलंगाना स्थित मूल निर्माता ह्यूमन बायोलॉजिकल्स इंस्टीट्यूट से संपर्क किया। कंपनी ने संबंधित बैच की जांच के बाद पुष्टि की कि यह बैच उसके द्वारा जारी नहीं किया गया था। इसके बाद विभाग ने कानूनी प्रक्रिया के तहत 120 वायल को नमूने के रूप में एकत्र किया। इन नमूनों को विस्तृत परीक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान भेजा गया है। शेष 361 यूनिट वैक्सीन और सात खरीद चालानों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के तहत जब्त किया गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट से वैक्सीन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता के संबंध में अतिरिक्त जानकारी मिलने की उम्मीद है।

कानपुर तक पहुंची जांच, दो दवा फर्मों पर कार्रवाई

दिल्ली में पकड़ी गई नकली वैक्सीन की खरीद से संबंधित दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसियों को कानपुर की एक दवा एजेंसी के बारे में जानकारी मिली। दिल्ली से प्राप्त सूचना के बाद उत्तर प्रदेश के औषधि नियंत्रण विभाग ने कानपुर में कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान बिरहाना रोड स्थित न्यू आरजे एजेंसी और एलेक्सा एजेंसी के परिसरों पर छापेमारी की गई। दोनों फर्मों को सील कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने संबंधित एजेंसी के संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की है। जांच अधिकारी वैक्सीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। कानपुर के अन्य दवा कारोबारियों से संभावित लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

क्या दूसरे राज्यों में भी पहुंची नकली वैक्सीन?

इस मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नकली वैक्सीन की कितनी खेप बाजार में भेजी गई और किन-किन स्थानों तक इसकी आपूर्ति हुई। दिल्ली में बरामद स्टॉक के अलावा अन्य दवा दुकानों और वितरकों तक वैक्सीन पहुंचने की संभावना की जांच आवश्यक है। खरीद चालान, वितरण रिकॉर्ड और संबंधित फर्मों के बीच हुए लेनदेन से पूरी आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाया जा सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित नकली बैच की कितनी यूनिट पहले ही बेची जा चुकी हैं या किसी मरीज को लगाई गई हैं। जांच पूरी होने से पहले इस संबंध में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी में नकली वैक्सीन गंभीर खतरा

रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो सामान्यतः संक्रमित जानवर के काटने या उसकी लार के संपर्क में आने से फैलती है। बीमारी के लक्षण विकसित होने के बाद यह लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है। हालांकि, समय रहते घाव की सफाई और उचित चिकित्सा के साथ टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है।

ऐसी स्थिति में नकली या गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली वैक्सीन की आपूर्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सितंबर की शुरुआत में भी अभयरैब के एक संदिग्ध बैच की गुणवत्ता और प्रामाणिकता को लेकर नियामकीय जांच की खबर सामने आई थी। निर्माता कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अधिकृत आपूर्ति माध्यमों से उपलब्ध उसकी वैक्सीन इस मामले से प्रभावित नहीं है।

वैक्सीन खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

इस घटना ने दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण व्यवस्था में निगरानी की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। मरीजों और उनके परिजनों को सलाह दी जाती है कि वे वैक्सीन अधिकृत अस्पतालों तथा लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही प्राप्त करें। दवा के पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और निर्माता की जानकारी अवश्य जांचें। यदि किसी व्यक्ति को संदेह है कि उसे संदिग्ध बैच की वैक्सीन लगाई गई है, तो वह तत्काल चिकित्सक से संपर्क करे। डॉक्टर उसकी टीकाकरण संबंधी जानकारी की समीक्षा कर आगे की आवश्यक चिकित्सा तय कर सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के टीकाकरण का निर्धारित कार्यक्रम रोकना खतरनाक हो सकता है।

दोषियों की पहचान और पूरी सप्लाई चेन की जांच पर जोर

दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हुई कार्रवाई के बाद जांच का प्रमुख उद्देश्य नकली वैक्सीन के वास्तविक स्रोत, वितरण नेटवर्क और इसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाना है। दवा निर्माता से मिली जानकारी और जब्त दस्तावेजों के आधार पर संबंधित एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं। कानपुर में दो फर्मों को सील किए जाने से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि नकली वैक्सीन दवा बाजार की नियमित आपूर्ति व्यवस्था में कैसे पहुंची। अब जांच के निष्कर्ष और प्रयोगशाला की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि संबंधित खेप के वितरण का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

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