भारतीय जनता पार्टी द्वारा नारी शक्ति सशक्तिकरण एवं महिला आरक्षण से जुड़े विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने भाग लिया और महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भाजपा नेत्री एवं सोशल वेलफेयर बोर्ड की पूर्व चेयरमैन सुमित्रा चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को समान अवसर देने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, लेकिन हाल ही में संसद में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को विपक्ष द्वारा गिराया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने अपने संबोधन में विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह केवल एक विधेयक की हार नहीं, बल्कि देश की लगभग 70 करोड़ महिलाओं के विश्वास के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि संसद में जो हुआ, उससे यह स्पष्ट हो गया कि कौन नारी शक्ति के साथ खड़ा है और कौन उनके अधिकारों के रास्ते में बाधा बन रहा है।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध करके अपना वास्तविक चेहरा उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दलों ने वर्षों तक महिलाओं के नाम पर राजनीति की, वही आज उनके अधिकारों को रोकने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिल गिरने पर विपक्षी नेताओं द्वारा जश्न मनाना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह देश की नारी शक्ति का अपमान भी है।
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष द्वारा OBC महिलाओं के नाम पर दिए गए तर्क केवल बहाने हैं, जबकि असल में यह एक सुनियोजित रणनीति के तहत बिल को रोकने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि पहले भी 2010 में इसी प्रकार के बहानों से महिलाओं के अधिकारों को रोका गया था।
इस अवसर पर सरोज राठी, चेयरमैन बहादुरगढ़ ने कहा कि महिलाओं के बिना समाज का समग्र विकास संभव नहीं है और सभी को मिलकर उनके अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए। वहीं श्रीमती सोमवती जाखड़, महिला मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि महिला मोर्चा निरंतर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है और आगे भी इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने नारी शक्ति को सशक्त बनाने के संकल्प को दोहराया और यह संदेश दिया कि महिलाओं के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ललित कुमार गोठवाल, झज्जर