मुंबई: बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री Pallavi Chatterjee ने अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में एक खास बातचीत में उन्होंने अपने फिल्मी सफर, प्रोडक्शन अनुभव और फिल्म Sholawala की सफलता को लेकर खुलकर चर्चा की।
पल्लवी चटर्जी ने बताया कि उन्होंने बहुत पहले ही प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रख लिया था। उन्होंने कहा कि उनका पहला प्रोजेक्ट Sahiba Bibi Gulam था, जिसे उन्होंने सहारा के लिए तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने सिर्फ प्रोड्यूसर ही नहीं, बल्कि क्रिएटिव डायरेक्टर और स्क्रीनप्ले राइटर की जिम्मेदारी भी निभाई थी। उनके अनुसार, एक कलाकार और निर्माता के रूप में उनका सफर हमेशा साथ-साथ चलता रहा है।
अपनी फिल्म ‘शोलवाला’ के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली। फिल्म की कहानी की प्रेरणा के बारे में उन्होंने कहा कि पहले के समय में कश्मीर से आने वाले शॉल बेचने वाले लोगों पर लोग आंख बंद करके भरोसा कर लेते थे। लेकिन आज के समय में पहचान और दस्तावेजों का महत्व बहुत बढ़ गया है, और बिना सही पहचान के किसी पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने बताया कि ‘शोलवाला’ इसी बदलती सामाजिक सोच और भरोसे की भावना को दर्शाती है। फिल्म में मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ सुरक्षा और पहचान जैसे गंभीर मुद्दों को एक अलग नजरिए से प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।
पल्लवी चटर्जी ने यह भी कहा कि फिल्म फेस्टिवल में सराहना मिलना गर्व की बात होती है, लेकिन किसी फिल्म की आर्थिक सफलता भी उतनी ही जरूरी होती है। उनके अनुसार, एक फिल्म को दर्शकों तक पहुंचना और व्यावसायिक रूप से सफल होना भी महत्वपूर्ण है।
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आज के दौर में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि अब कंटेंट ही सबसे बड़ा किंग है। दर्शक फिल्म के बजट से ज्यादा उसकी कहानी और प्रस्तुति को महत्व देते हैं। चाहे फिल्म छोटी हो या बड़े बजट की, अगर उसकी कहानी मजबूत है तो उसे जरूर पहचान मिलती है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बारे में उन्होंने कहा कि ये छोटे और नए फिल्ममेकर्स के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभरे हैं। हालांकि हर प्लेटफॉर्म के अपने नियम और शर्तें होती हैं, लेकिन अच्छी कहानी के लिए जगह हमेशा बनी रहती है।
अंत में पल्लवी चटर्जी ने कहा, “सबसे जरूरी बात यह है कि आप कुछ ऐसा बनाएं, जिस पर आपको खुद भरोसा हो। अगर आप अपने कंटेंट पर विश्वास रखते हैं, तो उसे दर्शकों तक पहुंचाने का रास्ता जरूर मिल जाता है—चाहे वह ओटीटी हो, यूट्यूब हो या कोई अन्य माध्यम।”