मुंबई। भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ जैसे कई कालजयी और सदाबहार गानों को अपनी जादुई आवाज देने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन हो गया है। उन्होंने रविवार शाम को मुंबई में 89 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही थीं।
उनकी करीबी सहेली मंगला खाडिलकर ने बताया कि सुमन जी ने रविवार रात करीब 8 बजे बहुत ही शांति से इस दुनिया को अलविदा कहा। भावुक करने वाली बात यह है कि अपने आखिरी दिनों में वे अपने ही गाए हुए पुराने गानों को सुन रही थीं। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं।
1960 और 1970 के दशक में जब सुर कोकिला लता मंगेशकर का संगीत इंडस्ट्री पर एकछत्र राज था, उस दौर में भी सुमन कल्याणपुर ने अपनी सुरीली आवाज के दम पर एक खास और अमिट पहचान बनाई। उनकी आवाज की बनावट, सुरों की शुद्धता और गाने का अंदाज काफी हद तक लता मंगेशकर से मिलता-जुलता था, जिसके कारण कई बार बड़े-बड़े संगीत पारखी भी उनकी आवाज को लेकर धोखा खा जाते थे।
हालाँकि, सुमन जी हमेशा इस तुलना को खारिज करती रहीं। साल 2022 के एक इंटरव्यू में उन्होंने लता जी को अपनी बेहद करीबी दोस्त बताते हुए कहा था कि उनसे मिलना हमेशा एक सहेली से मिलने जैसा अहसास कराता था।
60 के दशक में जब एक विवाद के चलते लता मंगेशकर और महान गायक मोहम्मद रफी ने एक-दूसरे के साथ गाने से इनकार कर दिया था, तब फिल्म इंडस्ट्री की पहली पसंद सुमन कल्याणपुर बनीं। उन्होंने रफी साहब के साथ एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए, जो आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं।
‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ (ब्रह्मचारी)
‘न न करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’ (जब जब फूल खिले)
‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ (राजकुमार)
बहुमुखी प्रतिभा की धनी: हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, असमी, कन्नड़, बंगाली और ओड़िया समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। संगीत जगत में उनके इसी अतुलनीय योगदान के लिए साल 2023 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया था।
मिली जानकारी के अनुसार, सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह करीब 11:30 से 12:00 बजे के बीच मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट पर किया जाएगा, जहाँ संगीत जगत और सिनेमा से जुड़ी कई हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगी। उनके जाने से भारतीय संगीत के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है।