मुंबई: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ज्वेलरी एवं कीमती धातु कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक ने कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों के कथित गलत प्रस्तुतीकरण, फंड डायवर्जन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के आरोप लगाए हैं।
सेबी के आदेश के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान कंपनी द्वारा घोषित राजस्व के बड़े हिस्से पर सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह आशंका जताई गई है कि कंपनी ने अपनी आय और कारोबार के आंकड़ों को वास्तविक स्थिति से कहीं अधिक दर्शाया। नियामक के मुताबिक कंपनी की अधिकांश आय विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से स्विट्जरलैंड स्थित इकाई के माध्यम से दिखाई गई, लेकिन उससे संबंधित वित्तीय जानकारी और वास्तविक कारोबारी गतिविधियों में कई विसंगतियां पाई गईं।
SEBI ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लेन-देन ऐसे दर्शाए गए जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी। साथ ही कंपनी के धन के उपयोग और संबंधित पक्षों को किए गए भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नियामक का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे निवेशकों के हित प्रभावित होने की आशंका है।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनी के संसाधनों और प्रमोटर से जुड़े वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की आवश्यकता है। इसी कारण सेबी ने जांच पूरी होने तक कंपनी और उसके प्रमुख प्रमोटर की बाजार गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया है।
इस मामले ने एक बार फिर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑडिट प्रक्रिया, बोर्ड की निगरानी व्यवस्था और वित्तीय खुलासों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे चर्चित वित्तीय मामलों में से एक बन सकता है।
सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय खुलासों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियामकीय निगरानी, स्वतंत्र ऑडिट और निदेशक मंडल की जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष आने तक आरोपों को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। हालांकि, सेबी की अंतरिम कार्रवाई ने निवेशकों और बाजार सहभागियों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित कर दिया है।