कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि ‘गोमाता गोसेवा रक्षा मंच ट्रस्ट’ के नाम पर बैंक खाते खोलकर देश के कई राज्यों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। मामले में पुलिस ने ट्रस्ट के नाम पर खाता खुलवाने वाले सूरज निषाद और बैंक कर्मचारी विक्रम कुमार को गिरफ्तार किया है।
डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर इस ट्रस्ट से जुड़े खातों के खिलाफ 9 राज्यों से 178 शिकायतें दर्ज हुई थीं। जांच में सामने आया कि साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, निवेश (Investment) फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन ठगी की रकम जमा करने के लिए कर रहे थे।
पुलिस जांच में ट्रस्ट के नाम पर चार अलग-अलग बैंक खातों का पता चला। इनमें से सिर्फ एक खाते में ही 36 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला। हैरानी की बात यह रही कि केवल एक सप्ताह में 18.57 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ और बैंक स्टेटमेंट 5,766 पन्नों का निकला।
पुलिस के मुताबिक, इंटरमीडिएट पास सूरज निषाद और उसकी पत्नी ने करीब दो साल पहले गोमाता गोसेवा रक्षा मंच ट्रस्ट बनाया था। बैंक कर्मचारी विक्रम कुमार की मदद से ट्रस्ट के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाया गया।
आरोप है कि विक्रम ने सूरज को लालच दिया कि खाते में होने वाले ट्रांजेक्शन का 5 प्रतिशत कमीशन मिलेगा। इसके बाद यह खाता कथित साइबर ठग रोहित मल्होत्रा को भारी रकम लेकर उपलब्ध करा दिया गया। बाद में इसी तरह एक्सिस बैंक, फिनो पेमेंट बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक में भी खाते खोले गए।
जांच के दौरान अलग-अलग शिकायतों के आधार पर एक्सिस बैंक के खाते में करीब 7 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए गए। पुलिस का कहना है कि अन्य खातों की भी गहन जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
आरोपियों के पास से कथित रूप से:
पुलिस के अनुसार, इनका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था। इन बरामद दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी सूरज निषाद के खिलाफ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। वहीं बैंक कर्मचारी विक्रम कुमार भी पहले चोरी के एक मामले में जेल जा चुका है।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी इस नेटवर्क की एक कड़ी हैं। पूरे गिरोह का पता लगाने, अन्य बैंक खातों की जांच और ठगी की वास्तविक राशि का आकलन करने के लिए जांच जारी है।