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RBI के प्रस्ताव को मंजूरी, जल्द आएंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट

नयी दिल्ली:  देश में मुद्रा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोटों का परीक्षण किया जाएगा। सरकार […]

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  • July 28, 2026 3:40 pm IST, Published 24 minutes ago

नयी दिल्ली:  देश में मुद्रा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोटों का परीक्षण किया जाएगा। सरकार ने संसद में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती चरण में इन नोटों को फील्ड ट्रायल के रूप में जारी किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर इन्हें नियमित रूप से प्रचलन में लाने पर निर्णय लिया जाएगा।

पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और लंबे समय तक उपयोग योग्य माने जाते हैं। इन्हें विशेष प्रकार की प्लास्टिक सामग्री से तैयार किया जाता है, जिससे ये जल्दी खराब नहीं होते। लगातार हाथों में आने, नमी, गंदगी या पानी के संपर्क में रहने के बावजूद इनकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों ने पहले ही पॉलिमर नोटों को अपनाया है।

आरबीआई का मानना है कि कम मूल्य के नोट सबसे अधिक उपयोग में आते हैं और सबसे जल्दी खराब भी हो जाते हैं। 10 और 20 रुपये के नोट रोजमर्रा के लेनदेन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में यदि इन्हें पॉलिमर सामग्री से बनाया जाता है तो इनकी आयु कई गुना बढ़ सकती है, जिससे बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता कम होगी।

सरकार के अनुसार, पहले चरण में इन नोटों का सीमित क्षेत्रों में फील्ड ट्रायल किया जाएगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि विभिन्न मौसम, तापमान और उपयोग की परिस्थितियों में इनकी गुणवत्ता कैसी रहती है। साथ ही आम लोगों, बैंकों और कारोबारियों से भी फीडबैक लिया जाएगा। यदि परीक्षण सफल रहता है तो आरबीआई इनके व्यापक स्तर पर जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

पॉलिमर नोटों की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर आसानी से जोड़े जा सकते हैं। इन नोटों में पारदर्शी विंडो, विशेष होलोग्राम, माइक्रो प्रिंटिंग और अन्य उन्नत सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नकली नोट तैयार करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा और मुद्रा की सुरक्षा मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में पॉलिमर नोटों के उत्पादन की लागत सामान्य नोटों से अधिक हो सकती है, लेकिन उनकी लंबी उम्र के कारण कुल खर्च में कमी आ सकती है। बार-बार छपाई, परिवहन और पुराने नोटों को बदलने की आवश्यकता कम होने से दीर्घकाल में यह व्यवस्था अधिक किफायती साबित हो सकती है।

भारत में इससे पहले भी पॉलिमर नोटों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन अब केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में ठोस प्रगति होने की संभावना बढ़ गई है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों को भी पॉलिमर सामग्री में जारी करने पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि सरकार और आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मौजूदा 10 और 20 रुपये के कागज के नोट पूरी तरह वैध बने रहेंगे। पॉलिमर नोटों का उद्देश्य मौजूदा मुद्रा को तुरंत बदलना नहीं, बल्कि नई तकनीक का परीक्षण करना है। इसलिए आम लोगों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और पुराने नोट पहले की तरह लेनदेन में स्वीकार किए जाते रहेंगे।

मुद्रा प्रणाली में यह बदलाव भारत की वित्तीय व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में फील्ड ट्रायल के परिणाम तय करेंगे कि पॉलिमर नोट देशभर में नियमित रूप से प्रचलन का हिस्सा बनेंगे या नहीं।

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