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छात्रों पर कार्रवाई नहीं रुकी तो होगा बड़ा आंदोलन

अभिजीत दीपके, कई राज्यों ने केस वापसी का किया ऐलान नई दिल्ली | कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई तुरंत नहीं रोकी गई, तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने […]

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  • July 29, 2026 4:32 am IST, Published 1 hour ago

अभिजीत दीपके, कई राज्यों ने केस वापसी का किया ऐलान

नई दिल्ली | कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई तुरंत नहीं रोकी गई, तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सरकारों को इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

इधर, बिहार और महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने भी NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है। राज्य के गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा धरना-प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं।

पार्टी का दावा है कि 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

अभिजीत दीपके ने दो दिनों में दूसरी बार आंदोलन की चेतावनी दी है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि यदि गिरफ्तार छात्रों को राहत नहीं मिली और पुलिस कार्रवाई जारी रही, तो CJP दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका, सौरव दास और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे।

दिल्ली में 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के बाद हुई हिंसा के मामलों में पुलिस ने 15 एफआईआर दर्ज की थीं। वहीं विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। महाराष्ट्र, बिहार और असम सरकारें केस वापसी और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की घोषणा कर चुकी हैं, जबकि राजस्थान सरकार ने भविष्य में कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकारें छात्रों से जुड़े मामलों पर आगे क्या फैसला लेती हैं और क्या प्रस्तावित आंदोलन टल पाएगा।

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