नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ उन याचिकाओं पर विचार करेगी, जिनमें 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता के आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रदर्शन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और NEET पेपर लीक के विरोध में किया गया था। आंदोलन 36 दिनों तक चला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को समाप्त हुआ।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार कर सकता है।
पहला, क्या प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायल हुए लोगों के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।
दूसरा, पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले वास्तव में प्रदर्शनकारी छात्र थे या फिर भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा को अंजाम दिया।
28 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि जिन नाबालिगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए।
साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों को विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था। इनमें सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, PCR लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हैं, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई थी। प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग था। बाद में सरकार द्वारा कुछ प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश देती है, तो मामले की जांच नए चरण में प्रवेश कर सकती है।