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TMC के फ्रीज खातों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ईडी से मांगा जवाब

नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फ्रीज बैंक खातों से पार्टी के दैनिक प्रशासनिक खर्चों के लिए सीमित राशि जारी किए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि क्या न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक की निगरानी में नियमित खर्चों के लिए कुछ […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • August 3, 2026 2:02 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फ्रीज बैंक खातों से पार्टी के दैनिक प्रशासनिक खर्चों के लिए सीमित राशि जारी किए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि क्या न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक की निगरानी में नियमित खर्चों के लिए कुछ धनराशि जारी की जा सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।

मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने की। यह याचिका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर की गई है। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था।

TMC का कहना है कि बैंक खाते फ्रीज होने से पार्टी के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन, कार्यालय संचालन और अन्य नियमित खर्चों के लिए धन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी आधार पर पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से सीमित राहत की मांग की है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के सामने एक व्यावहारिक सुझाव रखा। अदालत ने कहा कि यदि न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक की निगरानी में सीमित राशि जारी की जाती है और उसका पूरा लेखा-जोखा रखा जाता है, तो इससे पार्टी के नियमित कामकाज में बाधा नहीं आएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासक पहले से न्यायालय के आदेश के तहत नियुक्त हैं और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित है।

ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि लगभग 164 करोड़ रुपये की राशि अटैच नहीं की गई है और इस संबंध में विस्तृत निर्देश लेने के लिए उन्हें समय चाहिए। दूसरी ओर, TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पार्टी को वास्तविक राहत की आवश्यकता है और फ्रीज खातों के कारण संगठन का नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों पक्षों के बीच कानूनी बहस भी हुई। कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोपों और जांच के बावजूद पार्टी के सामान्य प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप नहीं होने चाहिए। वहीं ED ने कहा कि मामला अभी जांच के दायरे में है और इस पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाना आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से परहेज किया। पीठ ने कहा कि यदि इस स्तर पर विस्तृत निर्णय दे दिया जाए तो मुख्य याचिका के निस्तारण का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। अदालत ने दोनों पक्षों से सहयोग करने और मुख्य मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने की भी बात कही। यह पूरा मामला कथित मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिसके तहत ED ने TMC के कुछ बैंक खातों को फ्रीज किया था। इसके खिलाफ पार्टी पहले कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची थी, लेकिन वहां अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

अब सभी की नजर 11 अगस्त की सुनवाई पर है। उस दिन ED अदालत को यह बताएगी कि क्या न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक की निगरानी में दैनिक खर्चों के लिए सीमित राशि जारी की जा सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की प्रक्रिया और अंतरिम राहत पर निर्णय ले सकता है। यह मामला केवल एक राजनीतिक दल के बैंक खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई, राजनीतिक दलों के वित्तीय संचालन और न्यायिक संतुलन जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों से भी जुड़ा हुआ है।

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