पटना: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतगणना के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शुरुआती रुझानों और उपलब्ध मतगणना के अनुसार जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। 12वें राउंड तक की गिनती में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज कुमार से 6,646 वोटों के अंतर से आगे चल रहे हैं। हालांकि अंतिम नतीजे घोषित होना अभी बाकी हैं और चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही विजेता तय होगा।
बांकीपुर सीट इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा का केंद्र रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पहली बार प्रशांत किशोर इस सीट से सीधे चुनावी मैदान में उतरे हैं। वर्षों तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम करने के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता की परीक्षा देने का फैसला किया। ऐसे में बांकीपुर का मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीति का संकेतक भी माना जा रहा है।
मतगणना के दौरान सामने आए रुझानों में प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। मतगणना केंद्र के बाहर भी राजनीतिक दलों के समर्थकों की भारी मौजूदगी रही। जन सुराज समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया, जबकि भाजपा खेमे में अंतिम परिणाम का इंतजार करते हुए संयम बरता जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि अंतिम परिणाम में भी प्रशांत किशोर अपनी बढ़त बरकरार रखते हैं और जीत दर्ज करते हैं, तो इसका असर केवल बांकीपुर तक सीमित नहीं रहेगा। इसे बिहार की राजनीति में एक नए विकल्प के उभरने के रूप में देखा जा सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि विपक्षी दल इस परिणाम को भविष्य की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखेंगे।
भाजपा के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का विषय मानी जा रही है। बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में यदि परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं जाता है तो राजनीतिक स्तर पर इसकी व्यापक चर्चा होना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि चुनावी परिणामों का मूल्यांकन अंतिम आंकड़ों के आधार पर ही किया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान विकास, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बेहतर प्रशासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने पारंपरिक जातीय समीकरणों से हटकर मुद्दा आधारित राजनीति की बात कही थी। वहीं भाजपा ने अपने संगठनात्मक नेटवर्क और सरकार की योजनाओं के आधार पर मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास किया।
मतगणना के प्रत्येक राउंड के साथ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की निगाहें चुनाव आयोग द्वारा जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। बढ़त का अंतर समय-समय पर बदल भी सकता है, इसलिए अंतिम परिणाम आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल बांकीपुर की मतगणना बिहार की सबसे चर्चित चुनावी घटनाओं में शामिल हो चुकी है। अब सबकी नजर अंतिम नतीजे पर है, जो यह तय करेगा कि क्या प्रशांत किशोर अपनी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा में सफलता हासिल कर पाते हैं या भाजपा अंतिम दौर में वापसी करती है।