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सुपरनोवा के नलों में कीड़े, करोड़ों के फ्लैट में जल संकट

नोएडा: नोएडा के सेक्टर-94 स्थित सुपरटेक सुपरनोवा सोसाइटी में पानी की समस्या ने अब गंभीर रूप ले लिया है। करोड़ों रुपये की कीमत वाले फ्लैटों में रहने वाले कई परिवारों का आरोप है कि उनके नलों से पीले-काले रंग का बदबूदार पानी निकल रहा है और उसमें कीड़े भी दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया […]

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  • September 16, 2026 3:29 pm IST, Published 38 minutes ago

नोएडा: नोएडा के सेक्टर-94 स्थित सुपरटेक सुपरनोवा सोसाइटी में पानी की समस्या ने अब गंभीर रूप ले लिया है। करोड़ों रुपये की कीमत वाले फ्लैटों में रहने वाले कई परिवारों का आरोप है कि उनके नलों से पीले-काले रंग का बदबूदार पानी निकल रहा है और उसमें कीड़े भी दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय निवासियों के बयानों के बाद यह मामला चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सोसाइटी के 350 से अधिक परिवार इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पानी के अंदर छोटे जीव दिखाई देते हैं। तस्वीर में भी पानी के बीच ऐसे कण/जीव नजर आ रहे हैं, जिन्हें लेकर निवासी चिंता जता रहे हैं। � हालांकि, वायरल वीडियो या तस्वीर अपने आप में पानी के दूषित होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पानी की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मौजूद जीवों की प्रकृति की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है।

नलों से निकल रहा पीला-काला और बदबूदार पानी

स्थानीय निवासियों के अनुसार, समस्या केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं है। कुछ परिवारों ने किचन, बाथरूम और टॉयलेट फ्लश तक में गंदे और दुर्गंधयुक्त पानी आने की शिकायत की है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी निवासियों के हवाले से पानी के पीले-काले रंग का होने और उसमें कीड़े दिखाई देने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोसाइटी में 350 से अधिक परिवार इस स्थिति से प्रभावित बताए गए हैं।

निवासियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवारों को पीने और खाना बनाने के लिए पैकेज्ड पानी खरीदना पड़ रहा है। कुछ लोगों के लिए नहाने और अन्य घरेलू जरूरतों के पानी को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

गंगाजल आपूर्ति बंद होने के बाद बढ़ी परेशानी

रिपोर्टों के मुताबिक, सुपरनोवा परिसर में पहले गंगाजल की आपूर्ति होती थी, लेकिन पानी के बकाये को लेकर यह आपूर्ति करीब दो साल पहले बंद हो गई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सोसाइटी से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि पानी का बकाया पहले करीब 42 लाख रुपये था, जो ब्याज और अन्य देनदारियों के साथ बढ़कर 72 लाख रुपये से अधिक बताया गया।

वहीं, हिन्दुस्तान की सितंबर की रिपोर्ट में भी एओए की ओर से करीब 72 लाख रुपये के बकाये की जानकारी दिए जाने और गंगाजल कनेक्शन कटने की बात सामने आई थी।

निवासियों का कहना है कि बिल्डर से जुड़े वित्तीय और दिवालिया प्रक्रिया के विवाद का असर सीधे तौर पर मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है। दूसरी ओर, पानी की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे हैं, इसलिए बकाये, जिम्मेदारी और समाधान से जुड़े अंतिम तथ्यों को संबंधित प्राधिकरणों के आधिकारिक रिकॉर्ड से देखना जरूरी होगा।

भूजल और खराब ट्रीटमेंट सिस्टम पर सवाल

गंगाजल की आपूर्ति बंद होने के बाद सोसाइटी में भूजल पर निर्भरता बढ़ने की जानकारी सामने आई है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, भूजल को उपचारित कर घरों तक पहुंचाने वाला सॉफ्टनर प्लांट खराब होने की शिकायत भी सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्लांट के खराब होने और अन्य व्यवस्थागत समस्याओं के कारण पानी की गुणवत्ता को लेकर परेशानी बढ़ी।

इसी तरह एक अन्य रिपोर्ट में सोसाइटी के निवासियों को हाई-TDS वाले भूजल पर निर्भर रहने की बात कही गई थी। � हालांकि, पानी की मौजूदा गुणवत्ता, TDS, माइक्रोबायोलॉजिकल स्थिति और उसमें दिखाई देने वाले जीवों की वास्तविक प्रकृति का निष्कर्ष केवल प्रमाणित लैब टेस्ट से ही निकाला जाना चाहिए।

स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

दूषित या संदिग्ध पानी को लेकर सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य सुरक्षा की है। निवासियों ने त्वचा और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की शिकायतें भी की हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में एक परिवार के सदस्य ने बच्चे की त्वचा संबंधी परेशानी और पानी को लेकर डॉक्टर से परामर्श की बात बताई है। यह व्यक्तिगत अनुभव है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि स्वास्थ्य समस्या का कारण निश्चित रूप से यही पानी है।

विशेषज्ञ दृष्टि से देखें तो ऐसे मामलों में बिना जांच के पानी को पीने योग्य मानना उचित नहीं है। जब तक पानी की गुणवत्ता की पुष्टि न हो, निवासियों के लिए पीने और खाना बनाने के लिए सुरक्षित वैकल्पिक पानी का इस्तेमाल करना व्यावहारिक सावधानी हो सकती है।

शिकायतों के बाद समाधान की मांग

सुपरनोवा के निवासियों की ओर से गंगाजल आपूर्ति बहाल करने और पानी की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की जा रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, सोसाइटी से जुड़े लोगों ने नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन के सामने पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग रखी है।

निवासियों की मांग है कि पानी की पाइपलाइन, टैंक, ट्रीटमेंट सिस्टम और सप्लाई नेटवर्क की व्यापक जांच कराई जाए। साथ ही पानी के नमूने लेकर प्रमाणित प्रयोगशाला में जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पानी में किस प्रकार का प्रदूषण है और कीड़े या अन्य जीव पानी में किस स्रोत से पहुंच रहे हैं।

करोड़ों के फ्लैट, लेकिन बुनियादी सुविधा पर सवाल

सुपरटेक सुपरनोवा नोएडा की प्रमुख हाई-राइज परियोजनाओं में शामिल है। ऐसे में यहां पानी जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर सामने आई शिकायतें हाई-राइज सोसाइटी में जल प्रबंधन, रखरखाव और जिम्मेदारी के सवाल को सामने लाती हैं।

यह मामला केवल एक सोसाइटी के निवासियों की परेशानी तक सीमित नहीं है। नोएडा और दिल्ली-NCR में तेजी से बढ़ती ऊंची इमारतों में पानी की सप्लाई, भूजल पर निर्भरता, ट्रीटमेंट प्लांट की नियमित देखरेख और पाइपलाइन की स्वच्छता अहम मुद्दे बनते जा रहे हैं।

फिलहाल सुपरनोवा के मामले में सबसे जरूरी कदम पानी की वैज्ञानिक जांच, सप्लाई सिस्टम का निरीक्षण और जिम्मेदार पक्षों की स्पष्ट पहचान है। जब तक जांच के परिणाम सामने नहीं आते, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे जीवों को लेकर किसी निश्चित स्वास्थ्य निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। लेकिन नलों से बदबूदार, रंग बदला हुआ और संदिग्ध पानी आने की शिकायतें इतनी गंभीर हैं कि उनका त्वरित तकनीकी और प्रशासनिक समाधान जरूरी दिखाई देता है।

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