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UCC पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, संविधान का दिया हवाला

नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश में जारी राजनीतिक चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी राय सामने रखी है। मांझी ने अपने पोस्ट में संविधान, धर्मनिरपेक्षता और समानता के अधिकार का उल्लेख करते हुए UCC के अनुपालन को लेकर स्पष्ट रुख व्यक्त […]

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  • September 16, 2026 1:30 pm IST, Published 10 minutes ago

नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश में जारी राजनीतिक चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी राय सामने रखी है। मांझी ने अपने पोस्ट में संविधान, धर्मनिरपेक्षता और समानता के अधिकार का उल्लेख करते हुए UCC के अनुपालन को लेकर स्पष्ट रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का संविधान देश की धर्मनिरपेक्षता की नीति पर आधारित है और संविधान में दिए गए समानता के अधिकार को UCC के संदर्भ से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

मांझी ने अपने पोस्ट में कहा कि “बराबरी का अधिकार मतलब UCC”। उन्होंने यह भी लिखा कि समान नागरिक संहिता के अनुपालन में किसी तरह के दांव-पेच की बात करना उनकी समझ में गैर-संवैधानिक है। मांझी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने UCC को लेकर सोच-समझकर निर्णय लिया है। उनका बयान ऐसे समय सामने आया है जब बिहार समेत कई राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज है।

संविधान और समानता के अधिकार का दिया हवाला

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपने X पोस्ट में संविधान की मूल भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहेब का संविधान देश की धर्मनिरपेक्षता की नीति पर आधारित है और नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। उन्होंने UCC को इसी समानता के अधिकार के संदर्भ में प्रस्तुत किया।

UCC का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। हालांकि, देश में इसके स्वरूप, दायरे और लागू करने के तरीके को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मत रहे हैं।

मांझी के ताजा बयान ने इस बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में UCC के अनुपालन को लेकर किसी प्रकार के “दांव-पेच” को संविधान के अनुरूप नहीं बताया।

ट्रिपल तलाक और अनुच्छेद 370 का भी किया जिक्र

जीतन राम मांझी ने अपने बयान में केवल UCC तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने ट्रिपल तलाक और अनुच्छेद 370 का भी उल्लेख किया। मांझी ने कहा कि सरकार हर संवैधानिक व्यवस्था को लागू करने के पक्ष में है।

उनके इस बयान को उन संवैधानिक और कानूनी फैसलों के संदर्भ में देखा जा रहा है जिनका केंद्र सरकार लंबे समय से उल्लेख करती रही है। ट्रिपल तलाक के मामले में संसद ने 2019 में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम पारित किया था, जबकि जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में 2019 में महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव किए गए थे।

मांझी ने अपने पोस्ट में इन उदाहरणों का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि सरकार संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े फैसलों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती रही है।

किसी का चेहरा देखकर काम नहीं करेगी सरकार”

केंद्रीय मंत्री ने सरकार की कार्यशैली को लेकर भी अपने पोस्ट में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसी का चेहरा देखकर या किसी खास व्यक्ति अथवा वर्ग को खुश करने के लिए काम नहीं करेगी।

मांझी ने कहा कि सरकार राष्ट्रहित में फैसले ले रही है। उनके बयान में यह संदेश भी दिखाई देता है कि संवैधानिक व्यवस्थाओं को लागू करने के फैसले किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सरकार की घोषित नीति और संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर लिए जाने चाहिए।

यह बयान बिहार में UCC को लेकर चल रही चर्चा के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के अलग-अलग नेताओं की ओर से UCC को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

अब तालाब के पानी पर सबों का अधिकार होगा”

मांझी ने अपने पोस्ट में एक प्रतीकात्मक टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा—“अब तालाब के पानी पर सबों का अधिकार होगा।” इसके साथ उन्होंने समानता और अधिकार की अवधारणा को रेखांकित किया।

इस टिप्पणी को उनके उस तर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने समानता के अधिकार और UCC को एक-दूसरे से जोड़ा है। मांझी ने आगे कहा कि सरकार ऐसे फैसले ले रही है जो राष्ट्रहित में हैं और देश का बने रहना जरूरी है।

उनके बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज होने की संभावना है, खासकर बिहार के राजनीतिक संदर्भ में। UCC को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग स्तर पर चर्चा और विधायी प्रक्रिया चलती रही है। उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में इसे लेकर कानून या प्रक्रिया पर काम चल रहा है।

बिहार में UCC को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

UCC को लेकर बिहार में भी राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच चर्चा जारी है। हालिया घटनाक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 से पहले भाजपा शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात सामने आई थी। इसके बाद बिहार में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

ऐसे माहौल में जीतन राम मांझी का खुलकर UCC के पक्ष में संवैधानिक तर्क रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बयान के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, UCC के स्वरूप और इसके संभावित प्रभाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सामाजिक समूहों की अलग-अलग राय है।

मांझी ने अपने X पोस्ट में स्पष्ट किया कि वह UCC को संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने सरकार के फैसले को सोच-समझकर लिया गया निर्णय बताया और कहा कि संवैधानिक व्यवस्थाओं को लागू करने में किसी विशेष व्यक्ति या वर्ग को खुश करने की नीति नहीं होनी चाहिए।

फिलहाल UCC को लेकर देश में बहस जारी है। जीतन राम मांझी के इस बयान ने इस बहस में एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया जोड़ दी है। आने वाले दिनों में बिहार और अन्य राज्यों में UCC को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और अधिक स्पष्ट हो सकती हैं।

डिस्क्लेमर: इस खबर में मांझी के X पोस्ट में व्यक्त विचारों को उनके बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। UCC से जुड़े संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग मत हैं।

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