लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) बजट को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर साल अतिरिक्त बजट तो पेश करती है, लेकिन उसका पूरा उपयोग करने में विफल रहती है। उनका कहना है कि सरकार अपनी प्रशासनिक कमियों और वित्तीय अक्षमताओं को छिपाने के लिए बार-बार सप्लीमेंट्री बजट का सहारा ले रही है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि राज्य सरकार हर बार अनुपूरक बजट लेकर आती है, लेकिन उपलब्ध धनराशि का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती। उनके अनुसार, सरकार लगभग 30 प्रतिशत तक बजट खर्च करने में असफल रहती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन में गंभीर कमियां हैं।
सपा नेता ने सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि यह “चंदा चोर, चढ़ावा चोर और बजट चोर सरकार” है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम करने के बजाय केवल घोषणाएं करने में व्यस्त है। उनका कहना था कि अगर पहले से आवंटित बजट का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है, तो बार-बार अतिरिक्त बजट लाने का औचित्य समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि पहले जारी किए गए बजट की राशि कहां और किस तरह खर्च हुई। यदि योजनाओं का पैसा समय पर खर्च नहीं हो रहा है, तो इसका सीधा असर विकास कार्यों और जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।
शिवपाल यादव ने दावा किया कि प्रदेश में कई विकास परियोजनाएं बजट की कमी से नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बजट केवल पेश कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसका प्रभावी और पारदर्शी उपयोग भी उतना ही जरूरी है।
सपा नेता ने सरकार से मांग की कि वह बजट खर्च से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक करे और बताए कि किन योजनाओं पर कितनी राशि खर्च की गई है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी खजाने का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से विपक्ष के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार का कहना रहा है कि अनुपूरक बजट का उद्देश्य नई योजनाओं, अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं और विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराना होता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।