• होम
  • दिल्ली/NCR
  • बारापुल्ला फेज-III पर जाम से हड़कंप, पूरे कॉरिडोर की समीक्षा

बारापुल्ला फेज-III पर जाम से हड़कंप, पूरे कॉरिडोर की समीक्षा

बारापुल्ला फेज-III एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होने के कुछ ही समय बाद सामने आई भारी ट्रैफिक समस्या ने दिल्ली की यातायात व्यवस्था और बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 3, 2026 9:32 am IST, Published 59 minutes ago

नई दिल्ली। बारापुल्ला फेज-III एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होने के कुछ ही समय बाद सामने आई भारी ट्रैफिक समस्या ने दिल्ली की यातायात व्यवस्था और बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मयूर विहार से दक्षिणी दिल्ली और आईएनए की ओर तेज कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस कॉरिडोर पर शुरुआती दिनों में कई हिस्सों में वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। कुछ यात्रियों को सामान्य समय से कई गुना अधिक वक्त सड़क पर बिताना पड़ा।

बारापुल्ला फेज-III को लेकर उम्मीद थी कि पूर्वी दिल्ली, मयूर विहार और आसपास के क्षेत्रों से दक्षिणी दिल्ली की ओर जाने वाले लोगों को तेज वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए कॉरिडोर के खुलने के बाद बड़ी संख्या में वाहन चालक इस रास्ते पर पहुंचे। इससे उन स्थानों पर दबाव बढ़ गया जहां नया कॉरिडोर पुराने सड़क नेटवर्क से जुड़ता है। यही मर्जिंग पॉइंट बाद में ट्रैफिक जाम के प्रमुख कारणों में सामने आया।

मयूर विहार से सराय काले खां तक दबाव

रिपोर्टों में मयूर विहार, सूर्य घड़ी और सराय काले खां के आसपास यातायात दबाव का विशेष उल्लेख किया गया है। कुछ स्थानों पर अलग-अलग दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक सीमित हिस्से में एक साथ मिल रहा था। इससे वाहनों की रफ्तार कम हुई और पीछे की ओर लंबी कतार बनती चली गई। कुछ रिपोर्टों में पुराने और नए बारापुल्ला हिस्से के बीच लेन क्षमता के अंतर को भी बॉटलनेक का कारण बताया गया है।

मयूर विहार से आने वाले वाहन, डीएनडी क्षेत्र का ट्रैफिक और अन्य प्रमुख सड़कों से जुड़ने वाला यातायात जब एक ही क्षेत्र में पहुंचा तो सामान्य प्रवाह प्रभावित हुआ। ऐसे में जिस कॉरिडोर से कम समय में सफर पूरा करने की उम्मीद थी, वही शुरुआती दिनों में कई यात्रियों के लिए देरी का कारण बन गया।

15 मिनट के सफर की उम्मीद पर जाम का असर

बारापुल्ला फेज-III को पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यात्रा समय घटाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। परियोजना से जुड़े विवरणों में मयूर विहार और आईएनए के बीच यात्रा समय कम होने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन शुरुआती संचालन के दौरान कई यात्रियों को इसके विपरीत लंबे जाम का सामना करना पड़ा। 2 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, कुछ यात्रियों के लिए सफर दो घंटे से भी अधिक लंबा हो गया।

पूरे कॉरिडोर के डिजाइन की समीक्षा

भारी जाम के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और लोक निर्माण विभाग यानी PWD की ओर से कॉरिडोर की व्यवस्था की समीक्षा शुरू किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक ड्रोन सर्वे और संयुक्त निरीक्षण के जरिए लेन व्यवस्था, मर्जिंग पॉइंट्स और ट्रैफिक फ्लो का आकलन किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य प्रबंधन उपायों में बदलाव किए जा सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि समस्या केवल शुरुआती दिनों में अचानक बढ़े ट्रैफिक की वजह से है या कॉरिडोर के डिजाइन और मौजूदा सड़क नेटवर्क के बीच क्षमता का असंतुलन भी है। इसका स्पष्ट जवाब विस्तृत ट्रैफिक अध्ययन के बाद ही मिलेगा। अधिकारियों की समीक्षा इसी दिशा में अहम मानी जा रही है।

लेन मर्जिंग बना मुख्य चुनौती

हाल की रिपोर्टों में सूर्य घड़ी क्षेत्र के पास लेन मर्जिंग को विशेष चुनौती बताया गया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार नए हिस्से का ट्रैफिक आगे पुराने हिस्से की कम क्षमता वाली लेन व्यवस्था से मिलता है। जब कई दिशाओं से वाहन एक साथ पहुंचते हैं तो वाहन चालकों को लेन बदलनी पड़ती है और इससे अचानक गति कम हो जाती है।

आसपास के मार्गों पर भी असर

बारापुल्ला फेज-III की समस्या केवल एलिवेटेड कॉरिडोर तक सीमित नहीं रही। रिपोर्टों में लाजपत नगर, एम्स की दिशा, किदवई नगर और आसपास के हिस्सों में भी यातायात प्रभावित होने की बात सामने आई है। मयूर विहार के कुछ कट बंद होने और अलग-अलग दिशाओं के ट्रैफिक के एक जगह आने से समस्या बढ़ने की जानकारी भी सामने आई है।

दिशा-सूचक और लेन प्रबंधन भी जरूरी

नए मार्ग के शुरू होने पर वाहन चालकों के लिए स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड और लेन गाइडेंस बेहद जरूरी होते हैं। शुरुआती दिनों में यदि चालक सही निकास या कनेक्टिंग रोड को समय पर नहीं पहचान पाते हैं तो वे अचानक लेन बदल सकते हैं। इससे पीछे चल रहे वाहनों की गति प्रभावित होती है।

आगे क्या हो सकता है?

बारापुल्ला फेज-III दिल्ली की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है। शुरुआती जाम को देखते हुए प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि नए कॉरिडोर की क्षमता और आसपास के पुराने नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। यदि मर्जिंग पॉइंट, लेन व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन में जरूरी सुधार किए जाते हैं तो स्थिति में बदलाव आ सकता है।

फिलहाल यात्रियों के लिए जरूरी है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट देखें और पीक आवर्स में वैकल्पिक मार्गों की जानकारी रखें। आने वाले दिनों में ट्रैफिक पुलिस और PWD की समीक्षा से यह स्पष्ट होगा कि समस्या अस्थायी संचालन संबंधी है या कॉरिडोर के डिजाइन में स्थायी बदलाव की जरूरत है।

बारापुल्ला फेज-III का उद्देश्य दिल्ली के महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच यात्रा को तेज और सुगम बनाना है। शुरुआती अनुभव ने यह जरूर दिखाया है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की सफलता के लिए सड़क बनाना ही पर्याप्त नहीं है; उसके साथ लेन मर्जिंग, निकास, साइन बोर्ड और आसपास के पूरे ट्रैफिक नेटवर्क की क्षमता का तालमेल भी जरूरी है।

Advertisement