लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को कुछ राजनीतिक दल “चंदा चोरी” बताकर प्रचारित कर रहे हैं, वह वास्तव में चढ़ावे से संबंधित एक अलग प्रकरण है, जिसकी जांच ट्रस्ट के अनुरोध पर कराई गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है और जांच के आधार पर जिन लोगों की भूमिका पाई गई, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ दल लगातार संस्थाओं पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दलों की राजनीति विरोध और टकराव पर आधारित रही है, वे अब धार्मिक संस्थाओं और आस्था के केंद्रों को भी विवादों में घसीट रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट न्यायालय द्वारा गठित एक धर्मार्थ ट्रस्ट है और राज्य सरकार उसके कामकाज में बिना किसी औपचारिक अनुरोध या न्यायालय के निर्देश के हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि मीडिया में चढ़ावे से जुड़े मामले की खबरें सामने आने के बाद ट्रस्ट ने स्वयं राज्य सरकार को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, एसआईटी ने 23 जून को अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रस्ट ने 25 जून को औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कराई। एफआईआर के बाद पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि पूरा मामला अब न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ रहा है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान मंदिर परिसर में कार्यरत साधु-संतों की किसी प्रकार की संलिप्तता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में 1100 से अधिक लोग विभिन्न जिम्मेदारियों में कार्यरत हैं, जिनमें से केवल आठ लोगों की भूमिका जांच में सामने आई है। ऐसे में पूरे मंदिर, संत समाज या अयोध्या की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस मामले को तथ्यों से अलग तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका कहना था कि बिना जांच पूरी हुए पूरे मंदिर तंत्र, संत समाज और कर्मचारियों पर सवाल उठाना आस्था और धार्मिक संस्थाओं के प्रति अनुचित रवैया है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे संस्थान को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए कहा कि ये दल लंबे समय से राम जन्मभूमि आंदोलन और भगवान श्रीराम से जुड़े मुद्दों पर विरोध की राजनीति करते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अब भी वही दल राम मंदिर से जुड़े विषयों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता तथ्यों और राजनीति में अंतर समझती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी भी पद या जिम्मेदारी में क्यों न हो। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े मामले पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इस पूरे प्रकरण में पुलिस जांच जारी है और अदालत की निगरानी में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।