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SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का हलफनामा, याचिकाएं खारिज करने की मांग नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने अदालत से उन जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को खारिज करने की मांग की है, […]

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  • August 7, 2026 8:53 am IST, Published 1 hour ago

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का हलफनामा, याचिकाएं खारिज करने की मांग

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने अदालत से उन जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को खारिज करने की मांग की है, जिनमें एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और सरकारी नौकरियों में नई आरक्षण व्यवस्था की मांग की गई है।

केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि याचिकाओं में संविधान के तहत किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही, वर्तमान कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत क्रीमी लेयर का सिद्धांत एससी और एसटी वर्ग पर लागू किया जा सके।

सरकार ने स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर की अवधारणा केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) के लिए लागू होती है।

याचिका में क्या मांग की गई?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 11 अगस्त को रमाशंकर प्रजापति और अन्य की जनहित याचिकाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था।

याचिका में मांग की गई थी कि यदि किसी एससी-एसटी परिवार का सदस्य पहले से संवैधानिक या वरिष्ठ सरकारी पद पर है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का लाभ न दिया जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इससे आरक्षण का लाभ आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकेगा।

इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर एससी-एसटी वर्ग के लिए उप-श्रेणी (सब-कैटेगरी) बनाकर प्रवेश और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की भी मांग की गई थी।

संसद को ही है सूची में बदलाव का अधिकार

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार केवल संसद के पास है।

सरकार ने यह भी कहा कि याचिका स्थापित संवैधानिक और न्यायिक सिद्धांतों की अनदेखी करती है। हलफनामे में इंदिरा साहनी (मंडल आयोग) मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि एससी, एसटी और ओबीसी की पहचान केवल आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर की जाती है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सभी संबंधित जनहित याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है।

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