नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि छात्रों के भविष्य और उनकी चिंताओं को लेकर वास्तव में गंभीरता दिखाई जा रही है, तो केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे।
मीडिया से बातचीत में के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि अगर मोहन भागवत वास्तव में देश के युवाओं और ‘Gen Z‘ की चिंताओं को समझते हैं, तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े घटनाक्रमों पर सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में है और जिम्मेदार पक्ष को संसद में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उनके अनुसार, छात्रों की भावनाओं को देखते हुए सरकार को उनसे माफी मांगनी चाहिए और विवादित घटनाओं पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलनों के दौरान बल प्रयोग और सख्ती अपनाई गई, जिसे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और यदि कहीं अति हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। उनका कहना था कि केवल सहानुभूति जताने से स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि कार्रवाई और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं।
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर चिंता है तो उन घटनाओं की खुलकर निंदा होनी चाहिए जिनमें प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोप लगे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस पूरे मामले पर कई महत्वपूर्ण पक्षों की चुप्पी क्यों बनी हुई है और युवाओं के सवालों का सीधा जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा।
झारखंड में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि पार्टी का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि जहां भी छात्र अपनी भर्ती, परीक्षा या रोजगार से जुड़े वास्तविक मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, वहां कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकारों को उनसे बातचीत करनी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी हाल के दिनों में छात्रों के मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा था कि लोकतंत्र में युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए। वेणुगोपाल के अनुसार, रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समय पर परीक्षाएं युवाओं की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं और सरकारों को इन विषयों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भी कांग्रेस ने अपना विरोध दोहराया। वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी इस प्रस्तावित कानून का संसद के भीतर और बाहर मजबूती से विरोध करेगी। उनका कहना था कि ऐसा महत्वपूर्ण विधेयक, जिसका प्रभाव बड़ी संख्या में गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न समुदायों पर पड़ सकता है, उसे व्यापक चर्चा के बिना पारित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संसद का सामान्य कामकाज बाधित है, तब भी सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि ऐसे मामलों में सभी पक्षों की राय लेना और विस्तृत बहस कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार का विरोध जारी रखेगी।
छात्रों के आंदोलन, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, रोजगार और संसद में लंबित विधेयकों जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के प्रमुख केंद्र बने रह सकते हैं। कांग्रेस इन मुद्दों को जनता से जुड़े सवाल बताते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि सरकार का पक्ष भी इन मामलों पर महत्वपूर्ण रहेगा।