दरियाबाद पार्क कब्जा केस में आजम खान का नाम, SIT जांच शुरू

प्रयागराज के दरियाबाद इलाके में पार्क की जमीन पर कथित कब्जे का करीब दो दशक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद इस प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुराने मामले में अब समाजवादी पार्टी […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 10, 2026 11:25 am IST, Published 2 hours ago

प्रयागराज के दरियाबाद इलाके में पार्क की जमीन पर कथित कब्जे का करीब दो दशक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद इस प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुराने मामले में अब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान का नाम भी सामने आया है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

मामला वर्ष 2006 का बताया जा रहा है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और आजम खान नगर विकास मंत्री के पद पर थे। आरोप है कि इसी दौरान दरियाबाद में पार्क के लिए दर्ज सरकारी जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू हुई। शिकायतों के मुताबिक, 14, 15 और 18 अगस्त को लगातार सार्वजनिक अवकाश के दौरान जमीन पर कब्जे से जुड़ी गतिविधियां हुई थीं। आरोप यह भी है कि इस दौरान माफिया अतीक अहमद के करीबियों की भूमिका रही थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि SIT की जांच के बाद ही हो सकेगी।

करीब 20 वर्ष पुराने इस मामले को अब शासन स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने तीन अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित की है। SIT की अध्यक्षता एडीएम सिटी सत्यम कुमार मिश्र करेंगे। PDA सचिव विनीत कुमार सिंह और DCP सिटी मनीष शांडिल्य को टीम का सदस्य बनाया गया है।

जांच टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि वर्ष 2006 में पार्क की जमीन की वास्तविक स्थिति क्या थी और उस समय वहां कथित कब्जा किस तरह हुआ। इसके अलावा जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज, संबंधित विभागों की रिपोर्ट और उस समय की प्रशासनिक कार्रवाई की भी पड़ताल की जाएगी। टीम यह भी देखेगी कि जमीन पर कब्जे की जानकारी प्रशासन को कब मिली और शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या कदम उठाए थे।

इस मामले को हाल के दिनों में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से दोबारा उठाया गया था। बताया गया है कि पार्क की जमीन को कथित कब्जे से मुक्त कराने और सार्वजनिक उपयोग के लिए बहाल करने की मांग मुख्यमंत्री के सामने भी रखी गई थी। इसके बाद शासन ने मामले की जांच कराने का फैसला लिया।

दरियाबाद की इस जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बताई जाती रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक पार्क के रूप में होना था, उस पर धीरे-धीरे कब्जा कर लिया गया। जमीन की मौजूदा स्थिति और पुराने राजस्व रिकॉर्ड के बीच क्या अंतर है, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा।

SIT यह भी पता लगाएगी कि कथित कब्जे के दौरान किन लोगों की मौजूदगी या भूमिका थी और क्या किसी स्तर पर सरकारी मशीनरी की लापरवाही हुई। अगर जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

करीब 20 साल बाद दोबारा खुली इस फाइल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें उस दौर की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी जमीन की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। अब सबकी नजर SIT की रिपोर्ट पर है। जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और साक्ष्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि पार्क की जमीन पर कब्जा कैसे हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और उस समय प्रशासन की भूमिका क्या रही।

फिलहाल जांच शुरू हो चुकी है और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी। किसी भी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी मानना उचित नहीं होगा।

Advertisement