• होम
  • देश
  • FCRA को लेकर बढ़ा सियासी विवाद, सुजीत कुमार ने रिले मूर को लिखा पत्र

FCRA को लेकर बढ़ा सियासी विवाद, सुजीत कुमार ने रिले मूर को लिखा पत्र

नई दिल्लीः विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA को लेकर भारत में चल रही राजनीतिक बहस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती दिख रही है। इसी बीच राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को पत्र लिखकर FCRA से जुड़े उनके बयानों पर अपनी आपत्ति और स्पष्टीकरण सामने रखा है। […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 10, 2026 2:15 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्लीः विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA को लेकर भारत में चल रही राजनीतिक बहस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती दिख रही है। इसी बीच राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को पत्र लिखकर FCRA से जुड़े उनके बयानों पर अपनी आपत्ति और स्पष्टीकरण सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारत के एक सांसद के तौर पर यह उनकी जिम्मेदारी है कि FCRA को लेकर उठाई जा रही चिंताओं और आशंकाओं को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाए।

सुजीत कुमार ने अपने पत्र में कहा कि FCRA भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया कानूनी ढांचा है। उन्होंने अमेरिकी सांसद के सामने यह सवाल भी रखा कि भारत में विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले देश की कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था को समझना जरूरी है।

FCRA को लेकर क्या है विवाद?
FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act का उद्देश्य भारत में विदेशी स्रोतों से आने वाले धन के इस्तेमाल को नियंत्रित और विनियमित करना है। इसके तहत गैर-सरकारी संगठनों, संस्थाओं और अन्य पात्र संगठनों को विदेशी योगदान हासिल करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
FCRA को लेकर भारत में लंबे समय से बहस होती रही है। सरकार का तर्क रहा है कि विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना राष्ट्रीय हित के लिए आवश्यक है। वहीं आलोचकों का कहना है कि कड़े नियमों के कारण कई सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं के कामकाज पर असर पड़ा है।

इसी व्यापक बहस के बीच अमेरिकी सांसद रिले मूर की ओर से FCRA को लेकर चिंता जताए जाने के बाद सुजीत कुमार ने उन्हें पत्र लिखकर भारतीय पक्ष समझाने की कोशिश की है।

भारत के नजरिए को समझना जरूरी
अपने पत्र में सुजीत कुमार ने कहा कि किसी दूसरे देश की नीतियों पर टिप्पणी करते समय उसके ऐतिहासिक, कानूनी और सामाजिक संदर्भ को समझना आवश्यक है। उन्होंने अमेरिकी सांसद से आग्रह किया कि FCRA को लेकर भारत में लागू व्यवस्था को किसी बाहरी नजरिए से देखने के बजाय भारतीय परिस्थितियों के संदर्भ में समझा जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि विदेशी योगदान पर नियम बनाना किसी एक संस्था या संगठन को निशाना बनाने का विषय नहीं है, बल्कि यह विदेशी फंडिंग की निगरानी और उसके इस्तेमाल में जवाबदेही सुनिश्चित करने से जुड़ा है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा
FCRA को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच भी समय-समय पर तीखी बहस देखने को मिली है। गैर-सरकारी संगठनों पर कार्रवाई, लाइसेंस रद्द किए जाने और विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी राय रखते रहे हैं।
ऐसे समय में सुजीत कुमार का अमेरिकी सांसद को लिखा पत्र इस बहस को एक नया आयाम देता है। पत्र के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत में विदेशी योगदान को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी चर्चा में भारतीय कानून और देश की संप्रभुता के पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिले मूर इस पत्र और इसमें रखे गए भारतीय पक्ष पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल FCRA को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस के साथ-साथ विदेशी सांसदों की टिप्पणियों ने भी इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Advertisement